Homeउत्तर प्रदेशमहिला राजनीतिक भागीदारी पर संगोष्ठी, छात्राओं को बताए संवैधानिक अधिकार

महिला राजनीतिक भागीदारी पर संगोष्ठी, छात्राओं को बताए संवैधानिक अधिकार

रिपोर्ट : न्यूज डेस्क

लखनऊ। महिला सशक्तीकरण और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान और पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम के संयुक्त तत्वावधान में ‘नारी की राजनीतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका, उनके संवैधानिक अधिकार और नेतृत्व की संभावनाओं के बारे में जागरूक किया गया।

उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सृजन, शक्ति और संवेदना का प्रतीक माना गया है। अब जरूरत है कि महिलाओं को केवल सम्मान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने, नेतृत्व करने और अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखने के समान अवसर भी दिए जाएं।

उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संविधान के 106वें संशोधन के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

योगी सरकार की नीतियों से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर सरकार की विभिन्न योजनाओं से महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। ऐसे शैक्षणिक आयोजन छात्राओं में संवैधानिक जागरूकता, नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक भागीदारी की समझ विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

75 छात्राओं ने निबंध प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

कार्यक्रम के पहले दिन आयोजित निबंध प्रतियोगिता में करीब 75 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। एमए प्रथम वर्ष की शिवानी रावत ने प्रथम, बीए तृतीय वर्ष की वसुधा यादव ने द्वितीय और बीए तृतीय वर्ष की संजू ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेता छात्राओं को प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. डॉ. शिवानी श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्राओं में संवैधानिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करना भी है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मिशील, प्रो. डॉ. संजीव कुमार अग्रवाल और डॉ. साधना सिंह यादव ने महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी को समय की आवश्यकता बताया।

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