रिपोर्ट- प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। मानदेय में विसंगति को लेकर राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों को बुधवार को बड़ी राहत मिली। गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों से मिलने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मूसलाधार बारिश के बीच पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों के समाधान का भरोसा दिया।
प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों से 2018, 2019 और 2020 बैच के MBBS डॉक्टर शामिल हुए। डॉक्टरों ने समान डिग्री, समान बॉन्ड और समान सेवा के बावजूद अलग-अलग मानदेय दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने मानदेय में समानता के साथ लंबित एरियर का भुगतान करने की भी मांग की।
50-55 हजार बनाम 1.10 लाख रुपये मानदेय
डॉक्टरों के मुताबिक बॉन्ड सेवा के तहत उन्हें दो वर्ष की अनिवार्य सेवा या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के CHC, PHC समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देनी होती हैं।
डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें इसके बदले करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। वहीं, समान MBBS डिग्री और समान बॉन्ड प्रक्रिया के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में सेवा दे रहे डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक पारिश्रमिक मिल रहा है।
डिप्टी सीएम ने दिया जल्द आदेश का भरोसा
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ACS के स्तर पर पत्रावली पहले से चल रही है और जल्द ही शासन से आदेश जारी हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के साथ है और बॉन्डेड डॉक्टरों को समान वेतन दिलाने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। अलग-अलग जिलों से आए डॉक्टरों को यदि लखनऊ में रुकना पड़े तो उनके लिए आवश्यक व्यवस्था कराने का भी आश्वासन दिया गया।
