रिपोर्ट – अमित शुक्ला
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के ऐरवा कटरा ब्लॉक क्षेत्र का कुदरकोट कस्बा इन दिनों श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रंग में रंगा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुदरकोट का प्राचीन नाम कुंदनपुर था और इसी स्थान को भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं देवी रुक्मिणी का हरण किया था।

मथुरा, वृंदावन और बरसाना में जहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम है, वहीं उनकी ससुराल के रूप में प्रसिद्ध कुदरकोट में भी जन्माष्टमी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां लोग भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य के साथ-साथ परिवार के दामाद के रूप में भी श्रद्धा और प्रेम से पूजते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर कुदरकोट के मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, ढोलक की थाप और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
कुदरकोट में जन्माष्टमी का पर्व इसलिए भी विशेष माना जाता है, क्योंकि यहां भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी रुक्मिणी हरण की धार्मिक मान्यता लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जन्माष्टमी के मौके पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं।

जैसे-जैसे जन्माष्टमी की रात नजदीक आ रही है, श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाएंगे। पूरे कुदरकोट में इस समय **‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ कृष्ण भक्ति की छटा देखने को मिल रही है।

