रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। पिछले 15 वर्षों से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं होने से नाराज आयुष छात्रों ने बुधवार को हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तेज धूप के बीच धरने पर बैठे और सरकार से उनका स्टाइपेंड 7,500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जा चुका है, जबकि आयुष इंटर्न को अब भी 7,500 रुपये प्रतिमाह ही मिल रहे हैं। छात्रों ने इस भेदभाव को लेकर नाराजगी जताई और डिप्टी सीएम से मुलाकात की मांग पर अड़े रहे।

तेज धूप में छाता लेकर किया प्रदर्शन
बुधवार को गांधी प्रतिमा पर बड़ी संख्या में आयुष छात्र जुटे। तेज धूप के बावजूद छात्र-छात्राएं धरने पर बैठे रहे। कई छात्र छाता लेकर तो कुछ पोस्टर और बैनर से सिर ढककर प्रदर्शन करते नजर आए।
इस दौरान छात्रों ने ‘मेहनत हमारी पूरी है, 25 हजार मांग जरूरी है’ और ‘काम हमारा पूरा, स्टाइपेंड क्यों आधा-अधूरा’ जैसे नारे लगाए।
छात्रों का कहना है कि पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप के दौरान वे मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े विभिन्न कार्यों में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई में 7,500 रुपये प्रतिमाह में गुजारा करना बेहद मुश्किल है।
‘2011 से अब तक स्टाइपेंड में एक रुपये की बढ़ोतरी नहीं’
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर पवन शुक्ला ने कहा कि आयुर्वेद के छात्र नीट परीक्षा पास करने के बाद इस पाठ्यक्रम में दाखिला लेते हैं। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। उनके मुताबिक, 2011 में जो स्टाइपेंड तय किया गया था, वही आज तक चला आ रहा है।
उन्होंने कहा कि बहुत से छात्र किराए के कमरों में रहकर पढ़ाई और इंटर्नशिप कर रहे हैं। मौजूदा स्टाइपेंड से कमरे का किराया तक निकालना मुश्किल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले 15 वर्षों में महंगाई इतनी बढ़ गई है तो आयुष इंटर्न का स्टाइपेंड क्यों नहीं बढ़ाया गया।
डॉ. पवन शुक्ला ने एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही में उनके स्टाइपेंड को 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया गया है। आयुष छात्रों का कहना है कि जब वे भी मरीजों की सेवा और अस्पताल में जिम्मेदारियां निभा रहे हैं तो उन्हें भी समान स्टाइपेंड मिलना चाहिए।

‘प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न’
प्रदर्शन कर रहे प्रखर सिंह चौहान ने दावा किया कि पूरे प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उन्हें 7,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि इसकी शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी।
प्रखर सिंह के मुताबिक, शहर में किराए पर कमरा लेकर रहने वाले छात्र का मासिक खर्च करीब 20 से 25 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। ऐसे में छात्रों को अपने खर्च के लिए परिवार से अतिरिक्त पैसे लेने पड़ते हैं। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड कम से कम इतना किया जाए कि इंटर्न अपने जरूरी खर्च खुद उठा सकें।
डिप्टी सीएम से मुलाकात के बाद भी नहीं हुआ समाधान
छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्होंने मंगलवार को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की थी। छात्रों के मुताबिक, उन्हें शाम तक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो पा रही है और आश्वासन के बावजूद उनकी मांग पर निर्णय नहीं लिया गया। इसी के चलते उन्हें दोबारा गांधी प्रतिमा पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
छात्रों ने सरकार से जल्द उनकी मांग पर निर्णय लेने और आयुष इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग की है।
