रिपोर्ट- प्रिया बाजपेई शुक्ला
उत्तर प्रदेश में खानपान को लेकर क्षेत्रवार अलग-अलग तस्वीर सामने आती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शाकाहारी आबादी अधिक है, जबकि पूर्वांचल में मांसाहार का चलन ज्यादा देखने को मिलता है।
इंडिया डेटा मैप की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी यूपी में शाकाहार का स्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में करीब 60 फीसदी आबादी शाकाहारी है। मथुरा-वृंदावन में यह आंकड़ा 90 फीसदी से अधिक बताया गया है।
वहीं, वाराणसी और प्रयागराज के नए विकसित इलाकों में करीब 52 से 55 फीसदी आबादी शाकाहारी है। बुंदेलखंड में शाकाहारी आबादी 50 फीसदी से कम, करीब 47 फीसदी है।
लखनऊ में शाकाहार-मांसाहार का संतुलन
लखनऊ में शाकाहारी और मांसाहारी आबादी के बीच अपेक्षाकृत संतुलन देखने को मिलता है। यहां करीब 45 फीसदी लोग शुद्ध शाकाहारी बताए गए हैं। कानपुर में शाकाहारी आबादी करीब 48 से 50 फीसदी है। वहीं अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद शाकाहारी खानपान के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ने की बात सामने आई है।
पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा स्लॉटर हाउस
दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा स्लॉटर हाउस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक यूपी में 50 हजार से अधिक छोटी-बड़ी खुदरा मांस की दुकानें हैं। इनमें करीब 30 फीसदी दुकानें पश्चिमी यूपी में हैं।
मांस निर्यात से जुड़ी इकाइयों में भी उत्तर प्रदेश की बड़ी हिस्सेदारी है। अलीगढ़ को मांस उद्योग का प्रमुख क्लस्टर माना जाता है। इसके अलावा गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली और हापुड़ में भी मांस प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़ी इकाइयां हैं। मध्य यूपी में उन्नाव और बाराबंकी प्रमुख केंद्र हैं।
प्रदेश में करीब 260 स्लॉटर हाउस बताए गए हैं। इनमें 35 केंद्रीय लाइसेंसधारी, 25 स्टेट लाइसेंसधारी और 69 अन्य पंजीकृत निर्यात इकाइयां शामिल हैं।
खानपान में सेहत और पर्यावरण भी अहम
रिपोर्ट के मुताबिक शाकाहार अब केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। लोग इसे सेहत और पर्यावरण से भी जोड़कर देख रहे हैं।
एसजीपीजीआई की आहार विशेषज्ञ रीता आनंद के मुताबिक खानपान व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है। शाकाहारी भोजन में भी ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं, जिनसे शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि खानपान को केवल शाकाहार या मांसाहार के आधार पर पोषण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि मांसाहार का अत्यधिक सेवन मेटाबोलिक सिंड्रोम से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मांसाहार का पैटर्न अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलता है।
