रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ में रविवार को पारस महा संघ की आत्मसम्मान रैली आयोजित हुई। राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल से शुरू हुई इस रैली में करीब 25 हजार लोगों के जुटने का दावा किया गया। रैली में समान शिक्षा, रोजगारपरक शिक्षा, नशामुक्त समाज और अपराधमुक्त माहौल जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
पारस महा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर ने कहा कि देश को विकसित, आत्मनिर्भर, नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाने के लिए समान शिक्षा और रोजगारपरक शिक्षा लागू करना जरूरी है। उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर सीधी भर्ती करने और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई

‘संविदाकर्मियों का शोषण बंद हो’
कौशल किशोर ने कहा कि आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, रोजगार सेवक, शिक्षामित्र, शिक्षा अनुदेशक, पीआरडी जवान, होमगार्ड, बिजली और स्वास्थ्य विभाग समेत कई क्षेत्रों में संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों का शोषण बंद होना चाहिए और उन्हें सम्मानजनक रोजगार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी दफ्तरों, थानों और तहसीलों में जनता की बात सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए। जनता किंगमेकर है और उसका सम्मान करना जरूरी है।
रानी लक्ष्मीबाई और ऊदा देवी की प्रतिमाओं की मांग
कौशल किशोर ने राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पर रानी लक्ष्मीबाई, ऊदा देवी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह समेत अन्य महापुरुषों की ऊंची प्रतिमाएं लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल को और व्यापक स्वरूप दिया जा सकेगा।

19 अक्टूबर को नशामुक्ति पर विचार सम्मेलन
कौशल किशोर ने नशे के खिलाफ अभियान तेज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि उनके बेटे आकाश किशोर जैबी की 19 अक्टूबर 2020 को नशे के कारण मौत हुई थी। इसी के तहत 19 अक्टूबर को लखनऊ के गांधी भवन सभागार में ‘नशामुक्त, अपराधमुक्त, रोजगारपरक एवं एक समान शिक्षा’ विषय पर विचार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
2027 से पहले राजनीतिक सक्रियता पर भी नजर
रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी को कौशल किशोर के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मलिहाबाद, बीकेटी, सरोजनीनगर, मोहनलालगंज और सिधौली क्षेत्र में उनके प्रभाव की चर्चा होती रही है। उनकी पत्नी जयदेवी कौशल मलिहाबाद से विधायक हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में मोहनलालगंज सीट से हार के बाद यह रैली कौशल किशोर के लिए समर्थकों को फिर से लामबंद करने और 2027 से पहले अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने के प्रयास के तौर पर भी देखी जा रही है।
