न्यूज डेस्क ,लखनऊ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विभिन्न तंबाकू उन्मूलन केंद्रों पर लोगों को तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए तैनात किए गए कई डॉक्टर खुद तंबाकू का सेवन करते पाए गए। डॉक्टरों की यह आदत ही मरीजों की तंबाकू की लत छुड़ाने में बड़ी बाधा बन रही है। यह खुलासा केजीएमयू के कम्युनिटी डेंटिस्ट्री विभाग के एक सर्वे में हुआ है।
हाल ही में एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सर्वे में शामिल 14.8 प्रतिशत डेंटिस्टों ने खुद तंबाकू का सेवन करने की बात स्वीकार की। शोधकर्ताओं ने यूपी में वर्ष 2018 के बाद बीडीएस की पढ़ाई पूरी कर प्रैक्टिस कर रहे 264 डेंटिस्टों को अध्ययन में शामिल किया।
सिर्फ 37 फीसदी डॉक्टरों के पास था विशेष प्रशिक्षण
सर्वे में सामने आया कि तंबाकू उन्मूलन केंद्रों में काम करने वाले बीडीएस डॉक्टरों में से केवल 37.1 प्रतिशत के पास तंबाकू छुड़ाने की काउंसलिंग का विशेष प्रशिक्षण था। इसके अलावा कई डेंटिस्ट मरीजों को परामर्श देने की औपचारिक प्रक्रिया, दवाएं देने और नियमित फॉलोअप के मामले में भी लापरवाह पाए गए।
सिर्फ मेडिकल डिग्री से नहीं छूटेगी तंबाकू की लत
शोधकर्ताओं का कहना है कि मरीजों को तंबाकू की लत से बाहर निकालने के लिए केवल मेडिकल डिग्री पर्याप्त नहीं है। इसके लिए तंबाकू छुड़ाने वाली काउंसलिंग को नियमित इलाज का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। डॉक्टरों की ट्रेनिंग में व्यावहारिक बदलाव के साथ उन्हें मरीजों की मदद के लिए लगातार प्रेरित करने की भी जरूरत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मुंह के कैंसर की रोकथाम में डेंटिस्टों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में खुद स्वास्थ्यकर्मियों का तंबाकू सेवन करना चिंता का विषय है।
रोज करीब 3500 लोगों की मौत का दावा
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने भी तंबाकू सेवन के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। उनके अनुसार, भारत में तंबाकू के खतरनाक दुष्प्रभावों के कारण रोजाना करीब 3500 लोगों की मौत होती है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भी तंबाकू सेवन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पुरुषों में तंबाकू सेवन 2019-21 के 44 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 45.2 प्रतिशत हो गया। वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत से बढ़कर 9.6 प्रतिशत हो गया।
तंबाकू से 40 तरह के कैंसर का खतरा
डॉ. सूर्यकांत के मुताबिक तंबाकू के धुएं में करीब 7,000 हानिकारक रसायन होते हैं, जिनमें निकोटीन और टार प्रमुख हैं। धुएं में मौजूद करीब 150 तत्व कैंसरकारी हो सकते हैं और तंबाकू से करीब 40 तरह के कैंसर होने का खतरा रहता है। इसके अलावा कई अन्य गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि बीड़ी या सिगरेट का धुआं केवल सेवन करने वाले व्यक्ति को ही नुकसान नहीं पहुंचाता। इसका करीब 30 प्रतिशत धुआं फेफड़ों तक पहुंचता है, जबकि 70 प्रतिशत आसपास के वातावरण में फैल जाता है। इससे परिवार के सदस्य और आसपास रहने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं।
