रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला
राजधानी लखनऊ की जमीन अब प्रदर्शन की जमीन बन गई है अभ्यर्थी हो बैंकर्स हो या अन्य कोई भी विभाग के कर्मचारी हो या छात्र हो अपनी बातों को मनवाने के लिए प्रदर्शन का ही रास्ता अपना रहे हैं । एक बार फिर से राजधानी लखनऊ में 69000 सहायक सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थी धरना करने को मजबूर है यह मामला लगभग तीन-चार साल से मीडिया में बना हुआ है ।
नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने लखनऊ में बेसिक शिक्षा निदेशालय और महानिदेशक कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद पात्र घोषित किए जाने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक
भर्ती परीक्षा के एक सवाल के उत्तर को लेकर मामला अदालत पहुंचा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2021 को संबंधित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक देने और कोर्ट की शरण में आए अभ्यर्थियों की अंतिम चयनित मेरिट के आधार पर नियुक्ति पर विचार करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2022 में खारिज कर दिया था।
इसके बाद विभाग की ओर से जनवरी 2023 में संबंधित अभ्यर्थियों से प्रत्यावेदन मांगे गए। विभागीय प्रक्रिया के बाद 2 मार्च 2023 को 2249 अभ्यर्थियों को पात्र पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद भी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का दावा है कि मई 2026 में पात्र अभ्यर्थियों में से केवल एक को नियुक्ति दी गई, जबकि बाकी अभ्यर्थियों का मामला लंबित है। वहीं, नियुक्ति में देरी को लेकर आरक्षण से जुड़े विवाद का भी हवाला दिया जा रहा है।
अभ्यर्थियों ने विभाग से मांग की है कि पात्र अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस विवाद का समाधान होने से उन्हें राहत मिल सकेगी।
