मुंबई। मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा गिरगांव चौपाटी के करीब पहुंच गई है। ढोल-ताशों की गूंज और भावुक माहौल के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु बप्पा के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। हालांकि, समुद्र में ज्वार-भाटा की स्थिति को देखते हुए प्रतिमा के विसर्जन में देरी होने की संभावना है।
जलस्तर पर टिकी विसर्जन की प्रक्रिया
लालबागचा राजा की विशाल प्रतिमा का विसर्जन अत्याधुनिक तराफे के जरिए समुद्र में किया जाता है। इसके लिए समुद्र में पर्याप्त जलस्तर होना जरूरी है। ओहोटी के दौरान समुद्र का पानी पीछे चले जाने से प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से तराफे के जरिए समुद्र में ले जाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह 5:22 बजे समुद्र में पहली ओहोटी आई। इस दौरान जलस्तर करीब 0.97 मीटर दर्ज किया गया। ऐसे में प्रतिमा के विसर्जन के लिए अनुकूल जलस्तर का इंतजार करना पड़ सकता है।
पिछले साल 33 घंटे बाद हुआ था विसर्जन
पिछले साल भी समुद्र की स्थिति के चलते लालबागचा राजा के विसर्जन में लंबी देरी हुई थी। विसर्जन यात्रा सुबह करीब 7:30 बजे गिरगांव चौपाटी पहुंची थी। इसके बाद प्रतिमा को तराफे पर ले जाने के दौरान समुद्र की स्थिति के कारण तकनीकी परेशानी सामने आई थी।
बताया गया था कि तराफा पानी पर तैर रहा था, जबकि प्रतिमा की ट्रॉली पानी के नीचे थी। ऐसे में प्रतिमा को ट्रॉली से तराफे पर पहुंचाना मुश्किल हो गया था। स्थिति को देखते हुए मंडल ने समुद्र का जलस्तर अनुकूल होने तक इंतजार किया था।
समुद्र की स्थिति सामान्य होने का इंतजार
पिछले वर्ष कोली समुदाय के लोगों के साथ चर्चा के बाद भरती के दौरान विसर्जन नहीं करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद करीब 33 घंटे के इंतजार के बाद लालबागचा राजा का विसर्जन पूरा हुआ था।
इस बार भी समुद्र की स्थिति को देखते हुए प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतारने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन, मंडल के कार्यकर्ता और सुरक्षा एजेंसियां विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने में जुटी हैं।
गिरगांव चौपाटी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़
लालबागचा राजा के विसर्जन को देखने के लिए मुंबई के अलावा महाराष्ट्र और देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। गिरगांव चौपाटी पर बड़ी संख्या में भक्त मौजूद हैं और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
समुद्र के जलस्तर और ज्वार-भाटा की स्थिति के अनुसार ही आगे विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
