रिपोर्ट: न्यूज डेस्क, लखनऊ
ग्रेटर नोएडा, 29 सितंबर। कल्पना कीजिए कि अस्पताल जैसी कई जरूरी जांच सुविधाएं किसी बड़ी इमारत या भारी-भरकम लैब में नहीं, बल्कि एक ऐसी मशीन में मौजूद हों, जिसे कार में रखकर गांव-गांव तक ले जाया जा सके। मरीज सामने आए और मौके पर ही ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी, फेफड़ों, आंख और कान से जुड़ी जांच शुरू हो जाए। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ इसी तरह के पोर्टेबल हेल्थ सिस्टम की दिशा में तैयार किया गया मॉडल है।
करीब तीन लाख रुपये की इस मशीन को इस तरह विकसित किया गया है कि एक बूंद खून से कई जरूरी जांच की जा सकें। इसके जरिए करीब 10 मिनट में कुल 75 तरह के टेस्ट किए जाने की सुविधा का दावा किया गया है। मशीन को बिजली के अलावा बैटरी और सोलर पावर से भी चलाया जा सकता है।
इस मॉडल को यूपी के युवाओं की ओर से तैयार किया गया है। इसके पीछे उद्देश्य स्वास्थ्य जांच को अस्पतालों की चारदीवारी से बाहर निकालकर उन इलाकों तक पहुंचाना है, जहां बड़े अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
एक मशीन में कई तरह की जांच
एमडी इंटरनल मेडिसिन और डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी के फाउंडर एवं सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक, मशीन को प्राथमिक स्तर पर होने वाली कई महत्वपूर्ण जांच को एक ही जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, बॉडी एनालिसिस, ईसीजी और लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा भी शामिल है। उनका कहना है कि सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट समेत कुल 75 तरह की जांच करीब 10 मिनट में की जा सकती हैं।
इस मशीन की खासियत इसका पोर्टेबल होना है। इसे कार में रखकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। ऐसे में जिस गांव या दूरदराज क्षेत्र में अस्पताल अथवा डायग्नोस्टिक सेंटर उपलब्ध नहीं है, वहां जांच सुविधा पहुंचाने के लिए पूरी लैब स्थापित करने की जरूरत कम हो सकती है।
बिजली, बैटरी और सोलर से चलेगी मशीन
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को बिजली के साथ बैटरी और सोलर पावर से भी संचालित किया जा सकता है। इससे ऐसे इलाकों में भी इसका इस्तेमाल संभव हो सकता है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है।
पोर्टेबल होने के कारण मशीन को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने का मॉडल तैयार किया गया है।
महंगी जांच का खर्च कम करने का दावा
इस मॉडल के जरिए कई प्राथमिक जांच अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर की तुलना में कम लागत पर उपलब्ध कराने की क्षमता बताई गई है। दावा है कि कुछ मामलों में जांच का खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है।
अगर बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो गांवों और छोटे शहरों के लोगों को सामान्य जांच के लिए बार-बार बड़े अस्पतालों तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे जांच के खर्च के साथ-साथ अस्पताल तक आने-जाने में लगने वाला समय भी बच सकता है।
बीमारी गंभीर होने से पहले जोखिम पहचानने की कोशिश
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को केवल जांच मशीन के तौर पर नहीं, बल्कि एआई आधारित हेल्थ सिस्टम के रूप में विकसित करने की कोशिश की गई है।
उपलब्ध स्वास्थ्य संकेतकों और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह सिस्टम भविष्य में विकसित हो सकने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान में मदद कर सकता है। इसका उद्देश्य डॉक्टर को शुरुआती स्तर पर ज्यादा स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर मरीज को आगे की चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचाना है।
इस मॉडल की सोच यह है कि बीमारी गंभीर होने के बाद इलाज कराने के बजाय स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान पहले की जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्क्रीनिंग की सुविधा आसान होने से उन लोगों तक भी जांच पहुंच सकती है, जो दूरी या खर्च के कारण सामान्य स्वास्थ्य जांच टाल देते हैं।
बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करने की तैयारी
ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ उनका समय बचाना भी है।
उनके मुताबिक, अगर प्राथमिक स्तर की जांच स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाए तो हर मरीज को शुरुआती टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है। सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग स्थानीय स्तर पर होने के बाद जरूरत वाले मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर या बड़े अस्पताल में रेफर किया जा सकता है।
इस तरह यह मॉडल बड़े अस्पतालों पर मरीजों के दबाव को कम करने में भी मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य सेवा के साथ रोजगार का भी रास्ता
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को केवल मेडिकल इनोवेशन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। करीब तीन लाख रुपये की कीमत और पोर्टेबल स्वरूप के कारण इसे मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार के मॉडल के रूप में भी विकसित करने की योजना है।
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या उद्यमी इस मशीन के जरिए स्थानीय स्तर पर हेल्थ स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से 10 लाख रुपये की मदद भी मिली है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इसका प्रदर्शन प्रदेश में विकसित हो रहे स्वास्थ्य क्षेत्र के स्टार्टअप और इनोवेशन को भी सामने ला रहा है।
गांवों तक स्वास्थ्य जांच पहुंचाने की उम्मीद
भारत जैसे बड़े देश में अस्पतालों और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच के साथ डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता भी एक चुनौती है। ऐसे में कार में आसानी से ले जाई जा सकने वाली, बिजली-बैटरी-सोलर से चलने वाली और एक ही प्लेटफॉर्म पर कई तरह की जांच उपलब्ध कराने वाली मशीन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में सामने आई है।
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ का उद्देश्य स्वास्थ्य जांच को मरीज के नजदीक पहुंचाना है। अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर प्रभावी साबित होता है तो प्राथमिक जांच, शुरुआती स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के तरीके में बदलाव की संभावना बन सकती है।
