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गांधी जयंती पर प्रदेशभर में मनाया जाएगा ‘सुधार उत्सव’, ग्राम सभाओं में तय होंगी विकास की प्राथमिकताएं

न्यूज डेस्क ,लखनऊ 

लखनऊ। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के गांवों में ग्राम सभाओं का आयोजन ‘सुधार उत्सव’ के रूप में किया जाएगा  इन ग्राम सभाओं में ग्रामीण केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करेंगे, बल्कि गांव के विकास की प्राथमिकताएं भी तय करेंगे। रोजगार, पेयजल, जल संरक्षण, स्वच्छता, महिला आजीविका, जमीन, राशन, उपभोक्ता अधिकार, सहकारिता, बाल विवाह और नशामुक्ति जैसे मुद्दों को ग्राम सभा के एजेंडे में शामिल किया गया है।

सीएम योगी के विजन के अनुरूप 11 मंत्रालयों और विभागों से जुड़े विषयों को एक साथ ग्राम सभाओं तक पहुंचाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ गांव की जरूरतों और कमियों की पहचान कर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना है।

125 दिन रोजगार की गारंटी पर चर्चा

ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू की गई है। योजना में जल संरक्षण, आजीविका और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े 375 तरह के काम शामिल हैं।

ग्राम सभा में यह तय करने में भी भूमिका होगी कि गांव में विकास और रोजगार से जुड़े कौन से काम प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएं।

लखपति दीदियों को ‘करोड़पति दीदी’ बनाने का लक्ष्य

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक घरेलू आय हासिल करने वाली महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिन्हित की जा रही हैं।

महिलाओं को उद्यम शुरू करने, बाजार से जोड़ने और SHE-MARTs जैसी पहलों के जरिए सहयोग देने की योजना है। अब लखपति दीदियों को सालाना 10 लाख रुपये या उससे अधिक आय वाले स्तर तक पहुंचाने के लिए ‘करोड़पति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

हर घर नल के साथ लगातार साफ पानी पर जोर

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केवल घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने के बजाय नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। ग्राम पंचायतें पानी के स्रोत, आपूर्ति में आने वाली समस्याओं और रखरखाव की जरूरतों की समीक्षा करेंगी।

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण के तहत गांवों को ODF Plus Model की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी है। ग्राम सभाओं में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई और कचरे के पृथक्करण पर भी चर्चा होगी।

तालाब और रिचार्ज पिट की होगी पहचान

जल संरक्षण को लेकर ग्राम सभाओं में तालाबों और रिचार्ज पिट की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। जिन जल संरचनाओं को दोबारा ठीक करने की जरूरत है, उनकी पहचान की जा सकती है। घरों और खेतों के आसपास नई जल पुनर्भरण संरचनाएं बनाने में भी स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा।

उपभोक्ता अधिकारों की भी मिलेगी जानकारी

ग्राम सभाओं के जरिए ग्रामीणों को उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उपभोक्ता शिकायत के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 का इस्तेमाल कर सकते हैं। ई-जागृति के जरिए शिकायत दर्ज करने और ऑनलाइन सुनवाई में शामिल होने की सुविधा भी उपलब्ध है।

नए आपराधिक कानूनों के प्रति जागरूकता

गांवों में लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, कानूनी सहायता और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी। नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ डिजिटल साक्ष्य और तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण और विस्तार पर भी चर्चा होगी। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों और सहकारिता विभाग के कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण पर काम किया जा रहा है।

ग्राम पंचायतों तक सहकारी व्यवस्था पहुंचाने के लिए बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, डेयरी सहकारी समितियों और मत्स्य सहकारी समितियों को स्थापित एवं मजबूत करने की पहल भी की जा रही है।

बाल विवाह और नशे के खिलाफ लिया जाएगा संकल्प

ग्राम सभाओं में गांव को बाल विवाह मुक्त बनाने का प्रस्ताव भी पारित किया जा सकता है। सत्यापन के बाद जिला स्तर से गांव को प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था है। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों के साथ माता-पिता और ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।

इसके अलावा नशा मुक्त भारत अभियान के तहत बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने, शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और प्रभावित लोगों को परामर्श, उपचार व पुनर्वास की सुविधाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।

ग्राम सभा तय करेगी विकास की प्राथमिकता

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत पंचायतों को विकास से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार कर उसे eGramSwaraj पर अपलोड करती हैं। ग्राम सभा के जरिए गांव की जरूरतों और कमियों की पहचान कर प्राथमिकता वाले कार्यों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है।

स्वामित्व योजना से संपत्ति के रिकॉर्ड होंगे स्पष्ट

स्वामित्व योजना के तहत गांवों के आबादी वाले क्षेत्रों में घरों और अन्य आवासीय संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। डिजिटल नक्शों के आधार पर संपत्तियों की सीमाएं तय करने में मदद मिलती है। स्पष्ट रिकॉर्ड से जमीन-संपत्ति से जुड़े विवाद कम करने और बैंक ऋण लेने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इस तरह 2 अक्टूबर की ग्राम सभाएं रोजगार और विकास कार्यों की समीक्षा तक सीमित न रहकर रोजगार, महिला आजीविका, पानी, स्वच्छता, राशन, जमीन, उपभोक्ता अधिकार, कानून, सहकारिता, बाल विवाह और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर सामुदायिक चर्चा और स्थानीय प्राथमिकताएं तय करने का मंच बनेंगी।

 

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