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योगी बोले- जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज बांटने वाली ताकतों को सफल नहीं होने देना है

रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला 

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखने के लिए समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहना जरूरी है

उन्होंने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को विभाजित करने की कोशिशें देश की एकता के लिए चुनौती हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे समाज को एकजुट करने और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम आशियाना स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर से शिक्षक शामिल हुए।

‘हमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत के लिए काम करना है’

सीएम योगी ने कहा कि हमें तय करना होगा कि हम कैसा भारत चाहते हैं। बिखरा हुआ और जातीय खेमों में बंटा भारत या एकजुट और मजबूत भारत। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ होना चाहिए और इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में भी समाज को बांटने वाले तत्व सक्रिय थे। आज भी जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें होती हैं। ऐसे समय में शिक्षक समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। शिक्षकों को विभाजनकारी ताकतों को सफल नहीं होने देना चाहिए और समाज को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

2047 तक विकसित भारत के लिए कर्तव्य पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सामने है। इसके लिए गुलामी की मानसिकता को छोड़कर अपनी विरासत पर गर्व करना होगा। सामाजिक समता के साथ नागरिक कर्तव्यों को भी प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने कहा कि लोगों को अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ काम करने से देश को मजबूत बनाया जा सकता है।

शिक्षक युवा पीढ़ी को दें सही दिशा

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि वह समाज की चेतना और युग निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब शिक्षक जागरूक होकर अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता है तो देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा मिलती है।

उन्होंने भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए तक्षशिला, नालंदा और गुरुकुल परंपरा को याद किया। कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था ने समाज को चाणक्य, चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ और भगवान श्रीराम जैसे महान व्यक्तित्व दिए।

परिवारों के बिखराव पर भी जताई चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले संसाधन सीमित थे, लेकिन संयुक्त परिवार समाज की बड़ी ताकत हुआ करते थे। परिवार के सदस्य सुख-दुख और संकट में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। अब परिवार छोटे हो रहे हैं और कई बार एक ही छत के नीचे रहते हुए भी लोगों की सोच और दिशाएं अलग हो जाती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में परिवार और समाज को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। गायत्री परिवार ने बच्चों तक संस्कार पहुंचाने और युवा पीढ़ी को दिशा देने में काम किया है।

योग और भारतीय विरासत का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा और योग आज पूरी दुनिया तक पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 21 जून को दुनिया के करीब 190 देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विरासत पर गर्व करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहिए।

नदियों के संरक्षण पर भी दिया जोर

योगी ने नदियों के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नदियां जीवन के लिए उसी तरह जरूरी हैं जैसे शरीर के लिए धमनियां। नदियों को प्रदूषण से बचाने के साथ उन्हें अविरल और निर्मल बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। सूर्य सभी को प्रकाश देता है और पेड़ सभी को फल व ऑक्सीजन देते हैं। इसलिए मनुष्य का भी दायित्व है कि वह प्रकृति से जितना लेता है, उसके संरक्षण के लिए उससे अधिक योगदान देने का प्रयास करे।

11 लाख से अधिक छात्र प्रतियोगिता से जुड़े

मुख्यमंत्री ने बताया कि गायत्री परिवार की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को सही दिशा और संस्कार देकर ही देश के भविष्य को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्कूलों को सम्मानित किया और गायत्री परिवार की स्मारिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और गायत्री परिवार के पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे

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