आजकल की लाइफस्टाइल में आंखों की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर लंबे समय तक समय बिताने से आंखों में थकान, सूखापन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐसी रोजमर्रा की आदतें भी हैं जिन्हें हम सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इन पर ध्यान न देने से आंखों की सेहत प्रभावित हो सकती है।
वर्ल्ड साइट डे 2026 के अवसर पर आंखों की देखभाल और दृष्टि संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए स्वस्थ आदतें अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित आंखों की जांच और स्क्रीन का सही तरीके से इस्तेमाल आंखों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 8 आदतों के बारे में, जिनसे आंखों की सेहत प्रभावित हो सकती है।
1. लंबे समय तक स्क्रीन देखना
मोबाइल और लैपटॉप का लगातार इस्तेमाल आंखों पर दबाव डाल सकता है। इससे आंखों में सूखापन, जलन, थकान, सिरदर्द और कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। स्क्रीन देखते समय हम अक्सर कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों की नमी कम हो सकती है।
बचाव: हर 20 मिनट में लगभग 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखने की आदत अपनाएं। इसे 20-20-20 नियम कहा जाता है। स्क्रीन की चमक भी आसपास की रोशनी के अनुसार रखें।
2. धूप में सनग्लास न पहनना
सूरज की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे मोतियाबिंद और आंखों की अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए तेज धूप में आंखों की सुरक्षा करना जरूरी है।
बचाव: ऐसे सनग्लास पहनें जो 100 प्रतिशत UVA और UVB किरणों से सुरक्षा देते हों। बादलों वाले दिनों में भी UV किरणें मौजूद हो सकती हैं।
3. बार-बार आंखें मलना
आंखों में खुजली, थकान या जलन होने पर उन्हें रगड़ना आम आदत है। लेकिन गंदे हाथों से आंखें मलने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। आंखों पर बार-बार जोर डालना भी नुकसानदायक हो सकता है, खासकर यदि पहले से कॉर्निया से जुड़ी कोई समस्या हो।
बचाव: आंखों में खुजली होने पर उन्हें जोर से न रगड़ें। साफ हाथों से भी आंखों पर दबाव डालने से बचें। परेशानी बार-बार हो तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।
4. कॉन्टैक्ट लेंस की सफाई में लापरवाही
कॉन्टैक्ट लेंस को ठीक से साफ न करना, उन्हें पहनकर सोना या दूषित पानी के संपर्क में लाना आंखों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। माइक्रोबियल केराटाइटिस जैसे संक्रमण से कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है और गंभीर मामलों में नजर भी प्रभावित हो सकती है।
बचाव: लेंस को निर्धारित तरीके से साफ करें, समय पर बदलें और विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करें। लेंस पहनकर न नहाएं और न ही स्विमिंग करें, जब तक इसके लिए विशेष चिकित्सकीय निर्देश न हों।
5. आंखों की नियमित जांच न करवाना
ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी कई आंखों की बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं। ऐसे में केवल नजर कमजोर होने या दर्द होने पर ही जांच करवाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच से समस्याओं का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद मिल सकती है।
बचाव: उम्र, स्वास्थ्य और जोखिम के अनुसार नियमित आंखों की जांच करवाएं। डायबिटीज या परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना विशेष रूप से जरूरी है।
6. पर्याप्त पानी न पीना
शरीर में पानी की कमी होने पर आंखों में सूखापन और असहजता बढ़ सकती है। हालांकि, आंखों का सूखापन कई अन्य कारणों से भी हो सकता है, जैसे कुछ दवाएं, उम्र और लंबे समय तक स्क्रीन देखना।
बचाव: दिनभर नियमित रूप से पानी पिएं। यदि आंखों में लगातार सूखापन या जलन बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
7. पर्याप्त नींद न लेना
नींद की कमी से आंखों में थकान, भारीपन, लालिमा और सूखापन महसूस हो सकता है। देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत नींद की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है।
बचाव: नियमित समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं। सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
8. संतुलित आहार न लेना
आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। विटामिन A की कमी से दृष्टि संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि संतुलित आहार आंखों के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज, मेवे और ओमेगा-3 फैटी एसिड के स्रोत भोजन का हिस्सा होने चाहिए।
बचाव: अपने आहार में गाजर, पालक, मौसमी फल, दालें, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है।
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
- स्क्रीन देखते समय नियमित अंतराल पर ब्रेक लें।
- धूप में UV सुरक्षा वाले सनग्लास पहनें।
- आंखों को गंदे हाथों से न छुएं।
- कॉन्टैक्ट लेंस की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
- पर्याप्त नींद लें और संतुलित आहार अपनाएं।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार आंखों की नियमित जांच करवाएं।
ध्यान दें: आंखों में अचानक नजर कम होना, तेज दर्द, अचानक चमक या बहुत से नए फ्लोटर्स दिखाई देना जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। आंखों की देखभाल में छोटी-छोटी सावधानियां मददगार हैं, लेकिन किसी भी गंभीर समस्या में विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
