लखनऊ में NHM कर्मचारियों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदेश के 75 जिलों से आए हजारों संविदा कर्मचारी समान काम के लिए समान वेतन और नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में 20 हजार रुपये महीने की सैलरी में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शन में शामिल महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि इतनी कम सैलरी में घर का किराया दें, बच्चों की परवरिश करें, उनकी पढ़ाई का खर्च उठाएं या परिवार के बीमार सदस्यों का इलाज कराएं। महीने का खर्च पूरा करने के लिए कई बार उधार तक लेना पड़ता है।

कर्मचारियों का कहना है
घर से दूर तैनाती होने के कारण कमरे का किराया और दूसरे खर्च भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में न तो बचत हो पाती है और न ही बच्चों के भविष्य के लिए पैसे जमा कर पाते हैं। कुछ कर्मचारियों के लिए बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि खाते में किस्त जमा करना भी मुश्किल हो रहा है।
संविदा कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब वे नियमित कर्मचारियों की तरह काम करते हैं, तो उन्हें समान वेतन और सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं? उनका कहना है कि नियमित कर्मचारियों को जहां बेहतर वेतन मिलता है, वहीं संविदा कर्मियों को सीमित सैलरी में ही परिवार की सभी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।

कर्मचारियों ने पीएफ, ईएसआई और नौकरी की सुरक्षा जैसी सुविधाएं दिए जाने की भी मांग की। उनका कहना है कि बीमारी या किसी आपात स्थिति में इलाज का खर्च उठाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कई कर्मचारी वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और माता-पिता की जिम्मेदारी निभाने के लिए मौजूदा वेतन पर्याप्त नहीं है।
NHM कर्मचारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर फैसला नहीं होता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
