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नवरात्र विशेष-9: गति की शक्ति, सोनू मलान ने तोड़ी परंपरा, संभाला बस का स्टीयरिंग

अलीगढ़, 18 अक्टूबर।** नवरात्र के पावन अवसर पर शक्ति और साहस की चर्चा हो रही है। इसी बीच अलीगढ़ की सोनू मलान अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और जुनून से महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश कर रही हैं।

पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन क्षेत्र में सोनू ने बस का स्टीयरिंग संभालकर साबित किया है कि हौसले के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर तैनात सोनू रोजाना अलीगढ़ से नोएडा के बीच करीब 540 किलोमीटर का सफर तय करती हैं।

28 वर्षीय सोनू की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं, लेकिन सामाजिक रूढ़ियों के कारण आगे बढ़ने में झिझकती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अवसर, परिवार का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिल जाए तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।

 अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक

अलीगढ़ के जट्टारी क्षेत्र के हजियापुर गांव की रहने वाली सोनू मलान ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के रूप में अपना सफर शुरू किया था। वह अलीगढ़ से नोएडा के बीच रोडवेज बस चलाती हैं और प्रतिदिन चार चक्कर लगाकर करीब 540 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं।

सड़क पर बस चलाते हुए जब यात्री किसी महिला को चालक की सीट पर देखते हैं तो कई बार हैरान रह जाते हैं। हालांकि, सोनू की कुशल ड्राइविंग और जिम्मेदारी के साथ काम करने का अंदाज यात्रियों को प्रभावित करता है। उनका काम उन धारणाओं को चुनौती देता है, जिनमें कुछ पेशों को केवल पुरुषों तक सीमित मान लिया जाता है।

12 साल की उम्र में शुरू किया था ट्रैक्टर चलाना

सोनू को बचपन से ही गाड़ियां चलाने का शौक था। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने गांव में खेती-किसानी के काम के दौरान ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे यह शौक उनके जुनून में बदल गया।

वर्ष 2021 में जब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों के लिए अवसर आया तो सोनू ने भी आवेदन किया। चयनित महिलाओं में अलीगढ़ की सोनू मलान और गाजियाबाद के सिकंदराबाद क्षेत्र की वेद कुमारी शामिल थीं। इस अवसर ने सोनू को अपने शौक को पेशे में बदलने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने काम के जरिए पहचान बनाती चली गईं।

 सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय हैं सोनू

सोनू मलान की लोकप्रियता केवल सड़क तक सीमित नहीं है। वह सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों से जुड़ी हुई हैं। उनके यूट्यूब पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर डेढ़ लाख और फेसबुक पर लगभग साढ़े छह लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। इस तरह उनके कुल फॉलोअर्स की संख्या 10 लाख से अधिक है।

सोनू अक्सर बस चलाने से जुड़े वीडियो साझा करती हैं। उनके वीडियो के जरिए लोग उनके काम और रोजमर्रा की चुनौतियों को करीब से देख पाते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

 परिवार का मिला साथ, हौसले से बनाई पहचान

सोनू बताती हैं कि शुरुआत में कई लोगों ने कहा कि बस चलाना पुरुषों का काम है। लेकिन उन्होंने दूसरों की बातों से अपने सपनों को प्रभावित नहीं होने दिया। उनके परिवार ने भी इस सफर में उनका पूरा साथ दिया। सोनू का भाई भी परिवहन निगम में बस चालक है, जबकि उनके पिता शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं।

सोनू के मुताबिक, बस में सफर करने वाली कई लड़कियां और महिलाएं उन्हें देखकर सुरक्षित महसूस करती हैं और उनके काम की सराहना करती हैं। कुछ महिलाएं उनसे प्रेरित होकर अपने सपनों को पूरा करने का भरोसा भी जताती हैं।

नवरात्र के इस विशेष अवसर पर सोनू मलान की कहानी शक्ति, साहस और आत्मनिर्भरता का संदेश देती है। उनका सफर बताता है कि जब महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है और वे अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहती हैं, तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

 

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