न्यूज डेस्क, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहे हैं। झांसी जिले के दुर्गापुर गांव की सुमन गौतम ने छोटी-सी बचत, ऋण और प्रशिक्षण के सहारे सैनिटरी नैपकिन का कारोबार खड़ा कर अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2024 में शुरू हुआ उनका उद्यम आज 30 गांवों तक पहुंच चुका है। अब सुमन अपने कारोबार का विस्तार 60 गांवों तक करने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि स्वरोजगार के साथ वह ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के महत्व के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।
15 हजार की बचत से शुरू किया सफर
35 वर्षीय सुमन गौतम मां गायत्री स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। वह उन्नति प्रेरणा ग्राम संगठन और गंगासागर महिला प्रेरणा संकुल समिति से भी जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत के जरिए अपना रोजगार शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्ष 2024 में उन्होंने 15 हजार रुपये की बचत और समूह के माध्यम से 1.10 लाख रुपये का ऋण लेकर सैनिटरी नैपकिन का कारोबार शुरू किया। मेहनत और लगातार प्रयासों के दम पर उनका उद्यम धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।
ई-रिक्शा से 30 गांवों तक पहुंचाए उत्पाद
अपने उत्पादों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए सुमन ने ई-रिक्शा का सहारा लिया। इसके जरिए वह आसपास के 30 गांवों में सैनिटरी नैपकिन की आपूर्ति कर रही हैं। इस पहल से उन्हें ग्रामीण ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिली है। वर्तमान में वह इस कारोबार से करीब 20 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। अब उनका लक्ष्य अपने वितरण नेटवर्क को बढ़ाकर 60 गांवों तक पहुंचाना है, ताकि अधिक महिलाओं और किशोरियों को सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध हो सकें।
प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास
कारोबार को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए सुमन ने प्रशिक्षण लिया। उन्हें हिसाब-किताब रखने और विपणन से जुड़ी जानकारी भी मिली। इसके अलावा लखनऊ में एक्सपोजर विजिट का अवसर मिलने से उन्हें कारोबार की बारीकियां समझने में मदद मिली। प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और उद्यम को आगे बढ़ाने की दिशा दिखाई।
स्वरोजगार के साथ स्वच्छता का संदेश
सुमन अपने कारोबार को केवल कमाई तक सीमित नहीं रख रही हैं। सैनिटरी नैपकिन की आपूर्ति के साथ वह ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता अपनाने के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयास भी कर रही हैं। गांवों तक उत्पादों की पहुंच बढ़ने से महिलाओं के लिए इन्हें उपलब्ध कराना आसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच सुमन की पहल महिला उद्यमिता की संभावनाओं को सामने लाती है। उनकी कहानी बताती है कि छोटी बचत, ऋण, प्रशिक्षण और सहयोग के सहारे ग्रामीण महिलाएं अपना कारोबार खड़ा कर सकती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी भूमिका निभा सकती हैं। अब सुमन की नजर कारोबार को 60 गांवों तक पहुंचाने और मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता का दायरा बढ़ाने पर है।
