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यूपी पुलिस का बजट 2.7 गुना बढ़ा, 2.26 लाख से अधिक भर्तियां; 35,971 पदों पर प्रक्रिया जारी

लखनऊ, 21 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में पुलिस बल को मजबूत बनाने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए भर्ती, बजट, आधारभूत ढांचे और आधुनिक संसाधनों पर जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 में पुलिस विभाग का बजट 16,280.05 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 में बढ़कर 43,891.36 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह बजट में करीब 2.7 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद से पुलिस विभाग के विभिन्न पदों पर कुल 2,26,258 भर्तियां की गई हैं। वहीं, 35,971 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसी अवधि में अराजपत्रित स्तर के विभिन्न पदों पर 1,56,439 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी गई, जबकि 9,430 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है।

वाहनों की खरीद का बजट पांच गुना बढ़ा

पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए वाहनों, मशीनों और उपकरणों की खरीद के बजट में भी बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2017-18 में पुलिस विभाग के वाहनों की खरीद के लिए 126.72 करोड़ रुपये का प्रावधान था। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 627.35 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस मद में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है।

इसी तरह मशीनों और उपकरणों की खरीद के लिए आवंटन 266.55 करोड़ रुपये से बढ़कर 734.55 करोड़ रुपये हो गया है। इस मद में लगभग 2.8 गुना बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष में पुलिस आधुनिकीकरण योजना के लिए 112.29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

32,497 नए पदों के सृजन को मंजूरी

पुलिस बल की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न श्रेणियों में कुल 32,497 पदों के सृजन की स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही प्रदेश में नए थानों, पुलिस चौकियों और विशेष इकाइयों की स्थापना के जरिए पुलिस व्यवस्था का विस्तार किया गया है।

प्रदेश में नए थानों और विशेष इकाइयों का विस्तार

यूपी पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 134 जनपदीय थानों, सात महिला थानों और 95 पुलिस चौकियों की स्थापना की गई है। अयोध्या, मिर्जापुर, चंदौली और सिद्धार्थनगर में चार जल पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। महिला सुरक्षा और पारिवारिक परामर्श के लिए 75 जिलों में 78 महिला पुलिस चौकी परामर्श केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।

विशेष अपराधों से निपटने के लिए 73 साइबर अपराध थाने, 40 मानव तस्करी रोधी इकाई थाने, चार आर्थिक अपराध इकाई थाने, छह आतंकवाद निरोधक बल थाने और 10 सतर्कता अधिष्ठान थानों की स्थापना की गई है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की क्षेत्रीय स्तर पर आठ इकाइयां स्थापित की गई हैं। वहीं, मंडल स्तर की 18 इकाइयों को थाने के रूप में अधिसूचित करने की स्वीकृति दी गई है।

प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक विद्युत निरोधक यानी बिजली चोरी से जुड़े मामलों के लिए पुलिस थाने खोलने की स्वीकृति भी दी गई है। इसके अलावा विशेष सुरक्षा बल की छह वाहिनियों को प्रयागराज, गोरखपुर, लखनऊ, मथुरा, सहारनपुर और अयोध्या में स्थापित करने की व्यवस्था की गई है। लखनऊ, बदायूं और गोरखपुर में तीन पीएसी महिला वाहिनियों की स्थापना भी पुलिस ढांचे के विस्तार का हिस्सा है।

हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था

डिजिटल गतिविधियों के बढ़ने के साथ साइबर अपराध से निपटना पुलिस के सामने एक अहम चुनौती है। इसे देखते हुए प्रदेश के प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही साइबर अपराध से संबंधित मामलों की जांच और कार्रवाई के लिए 73 साइबर अपराध थाने स्थापित किए गए हैं।

पुलिस भवनों के निर्माण पर 783 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति

पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में भवन निर्माण से जुड़े 166 कार्यों के लिए 783.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। इसके सापेक्ष कार्यदायी संस्थाओं को 709.91 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इन कार्यों में 120 नए निर्माण और 46 निर्माण कार्यों की शेष किश्तें शामिल हैं।

इसी वित्तीय वर्ष में 821.62 करोड़ रुपये की लागत वाले 123 निर्माण कार्य पूरे कर संबंधित विभागों को सौंपे जा चुके हैं। इनमें पुलिस थाने, चौकियां, अग्निशमन केंद्र, विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं, थाना हवालात, पुलिस लाइन में बहुमंजिला आवासीय भवन और बैरक शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त 25 पुलिस थानों के प्रशासनिक एवं आवासीय भवनों, 16 अग्निशमन केंद्रों, नौ भ्रष्टाचार निवारण संगठन थानों और पांच साइबर थानों के भवनों सहित अन्य निर्माण कार्यों को भी स्वीकृति दी गई है।

भर्ती, पदोन्नति, आधुनिक उपकरणों की खरीद, विशेष इकाइयों के विस्तार और नए भवनों के निर्माण से प्रदेश में पुलिस व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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