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श्री जन सहयोगी इंटर कॉलेज में शिक्षकों की उपस्थिति और पाठ्यक्रम को लेकर उठे सवाल

*रिपोर्ट दीपक अवस्थी 

अजीतमल औरैया। श्री जन सहयोगी इंटर कॉलेज अमावता में शिक्षकों की उपस्थिति, अवकाश और विद्यार्थियों की पढ़ाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इसी बीच विद्यालय के अध्यापक जितेंद्र सहाय और एक कर्मचारी के बाइक से जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अध्यापक जितेंद्र सहाय के शनिवार को सुबह विद्यालय से निकलने तथा सोमवार को देर से आने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले की वास्तविकता जानने के लिए विद्यालय का उपस्थिति रजिस्टर, अवकाश पंजिका और अन्य अभिलेखों की जांच कराए जाने की मांग की गई है।

वहीं, विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा मीडिया से बात न किए जाने की बात भी सामने आई है। इस संबंध में प्रधानाचार्य का पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है। विद्यालय में सूचना पहुंचने के बाद कर्मचारियों द्वारा व्यवस्थाएं संभालने की कवायद किए जाने की भी चर्चा है।

साधेय सिंह सेंगर के अवकाश की भी जांच की मांग

अध्यापक साधेय सिंह सेंगर उर्फ रवि सेंगर के अवकाश को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मांग की गई है कि उनके अवकाश की अवधि, स्वीकृति और उपस्थिति संबंधी अभिलेखों की जांच की जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

हाईस्कूल के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम को लेकर चिंता

सबसे गंभीर सवाल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम को लेकर उठ रहे हैं। फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और शैक्षिक सत्र का काफी समय बीत चुका है। आरोप है कि हाईस्कूल के विद्यार्थियों का सामाजिक विज्ञान विषय का पाठ्यक्रम अभी तक आधा भी नहीं कराया गया है।

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों से अधिक समय में करीब दो महीने से अधिक समय अवकाश में निकल गया, जबकि कुछ समय प्रवेश प्रक्रिया में भी बीता। ऐसे में अभिभावकों और विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई है।

मामले में मांग की गई है कि विद्यालय के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों से सीधे जानकारी लेकर यह पता लगाया जाए कि प्रत्येक विषय का कितना पाठ्यक्रम पूरा कराया जा चुका है। साथ ही शिक्षकों की उपस्थिति, स्वीकृत अवकाश, कक्षा संचालन और पाठ्यक्रम की प्रगति की जांच कराई जाए।

अभिभावकों का कहना है कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इन शिकायतों और वायरल वीडियो को लेकर कब तक जांच कराता है और जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

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