रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ में दिवाली से पहले उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के स्वाद और पारंपरिक हुनर का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘Taste of Uttar Pradesh 2026’ प्रदर्शनी में प्रदेश की संस्कृति, खानपान और हस्तशिल्प की झलक एक ही जगह देखने को मिल रही है। कहीं आजमगढ़ की मशहूर ब्लैक पॉटरी लोगों को आकर्षित कर रही है तो कहीं अयोध्या का खुरचन पेड़ा और सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल अपनी खास पहचान बना रहे हैं।
4 और 5 नवंबर को आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रदेश के सभी 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की करीब 125 दुकानें लगाई गई हैं। इसके अलावा ODOP और ODOC के तहत जिलों के खास उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं। यहां आने वाले लोग खरीदारी के साथ अलग-अलग जिलों के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले रहे हैं।
35 साल से ब्लैक पॉटरी को दे रहे नया रूप
आजमगढ़ की निजामाबाद ब्लैक पॉटरी प्रदर्शनी में खास आकर्षण बनी हुई है। पिछले 35 साल से इस शिल्प से जुड़े सोहित प्रजापति ने बताया कि पहले मिट्टी और पोखरे की कमी के कारण काम करना काफी मुश्किल था। हाथ से चाक चलाने में भी समय और मेहनत अधिक लगती थी।
उन्होंने बताया कि सरकार की मदद से अब मिट्टी और पोखरे की सुविधा मिली है। बिजली से चलने वाला चाक मिलने के बाद काम भी आसान हो गया है। अब पारंपरिक दीये और बर्तनों के साथ पानी की बोतल, भगौना, कड़ाही और कई नए डिजाइन के उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।
दिवाली को देखते हुए शंख के आकार वाले दीयों की मांग बढ़ी है। सोहित ने बताया कि एक समय मिट्टी की कमी के चलते उन्हें पुश्तैनी काम छोड़कर नौकरी करनी पड़ी थी, लेकिन सरकारी मदद मिलने के बाद वह दोबारा इस काम से जुड़ सके। निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी को GI टैग मिला है और यह आजमगढ़ के ODOP उत्पादों में शामिल है।
चार पीढ़ियों से कायम है अयोध्या के खुरचन पेड़े की मिठास
प्रदर्शनी में अयोध्या का मशहूर खुरचन पेड़ा भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है। एक जिला एक व्यंजन (ODOC) के तहत मौर्या मिष्ठान भंडार ने अपना स्टॉल लगाया है। यहां मौजूद विकास तिवारी ने बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से खुरचन पेड़ा बनाने के पारंपरिक कारोबार से जुड़ा है। शुद्ध देसी घी से तैयार यह पेड़ा अपने खास स्वाद और मिठास के लिए जाना जाता है।
विकास ने बताया कि इससे पहले उन्हें नोएडा में भी स्टॉल लगाने का अवसर मिला था। दिवाली से पहले अयोध्या की पारंपरिक मिठाई को लखनऊ के लोगों तक पहुंचाना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय व्यंजनों को दूसरे शहरों में पहचान मिलती है और छोटे कारोबारियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल की विदेशों तक पहचान
प्रदर्शनी में सिद्धार्थनगर का GI टैग प्राप्त काला नमक चावल भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसे बुद्ध चावल या बुद्धा ब्लेसिंग के नाम से भी जाना जाता है। सुजाता ट्रेडर्स की सुजाता ने बताया कि वह महिला उद्यमी हैं और सरकार से मिले सहयोग ने उन्हें कारोबार शुरू करने और आगे बढ़ाने में मदद की।
उन्होंने बताया कि उनका काला नमक चावल उज्बेकिस्तान समेत कई देशों में भेजा जा रहा है। दूसरे देशों में भी कारोबार बढ़ाने को लेकर बातचीत चल रही है। सुजाता के मुताबिक, चार साल पहले वह TGT की तैयारी कर रही थीं, लेकिन बाद में उन्होंने काला नमक चावल के कारोबार से जुड़ने का फैसला किया। शुरुआत में किसानों से संपर्क करने और कारोबार को समझने में मुश्किलें आईं, लेकिन परिवार के सहयोग से धीरे-धीरे काम आगे बढ़ा।
सुजाता ने कहा कि इस कारोबार ने उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर दिया है। काला नमक चावल को बुद्ध काल से जुड़ा माना जाता है। इसके पोषण संबंधी गुणों के कारण भी इसकी मांग बढ़ रही है। ODOP योजना के तहत सिद्धार्थनगर में इसकी खेती से जुड़े किसानों और खेती के रकबे में भी बढ़ोतरी हुई है।
इस तरह ‘Taste of Uttar Pradesh 2026’ प्रदर्शनी सिर्फ खानपान और खरीदारी का मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के पारंपरिक स्वाद, स्थानीय शिल्प और महिला उद्यमिता को नई पहचान देने का माध्यम भी बन रही है।
