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लक्ष्मी जी भगवान विष्णु के चरणों में क्यों बैठती हैं? दीपावली पर जानिए इस तस्वीर में छिपा जीवन का बड़ा संदेश

रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला

रविवार, 8 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं।

आपने अक्सर भगवान विष्णु की ऐसी तस्वीर देखी होगी, जिसमें मां लक्ष्मी उनके चरणों के पास बैठी दिखाई देती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस तस्वीर के पीछे क्या संदेश छिपा है? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह मुद्रा केवल देवी-देवताओं के स्वरूप को नहीं दर्शाती, बल्कि मनुष्य को कर्म, धर्म, विनम्रता और धन के सही इस्तेमाल की सीख भी देती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, भगवान विष्णु पालनहार और रक्षक हैं। वे पुरुषार्थ के प्रतीक माने जाते हैं। श्रीहरि ने अलग-अलग युगों में अनेक अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश किया। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

पुरुषार्थ करने वाले के पास आती हैं मां लक्ष्मी

लक्ष्मी-विष्णु की तस्वीर में मां लक्ष्मी को भगवान के चरणों के पास बैठे दिखाया जाता है। इस मुद्रा को जीवन प्रबंधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसका संदेश है कि धन की प्राप्ति के लिए केवल भाग्य के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को ईमानदारी, मेहनत और धर्म के साथ अपने कर्म करते रहना चाहिए।

मान्यता है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करता है और धर्म के रास्ते पर चलता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। मां लक्ष्मी ऐसे ही व्यक्ति पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

धन का अहंकार नहीं, विनम्रता जरूरी

इस तस्वीर से मिलने वाली एक बड़ी सीख यह भी है कि व्यक्ति को कभी धन का अहंकार नहीं करना चाहिए। धन को अपने सिर पर चढ़ाने के बजाय उसे जीवन की जरूरतों को पूरा करने का साधन समझना चाहिए।

जब व्यक्ति धन को ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना लेता है, तो उसके भीतर अहंकार और लालच बढ़ने लगता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति धन मिलने पर भी विनम्र बना रहता है और उसका इस्तेमाल परिवार, समाज, सेवा तथा अच्छे कार्यों में करता है, उसका जीवन अधिक संतुलित रहता है।

भाग्य से ज्यादा जरूरी है कर्म

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की यह तस्वीर कर्म की महत्ता भी बताती है। केवल भाग्य के भरोसे बैठने से सफलता नहीं मिलती। इसके लिए निरंतर प्रयास और सही दिशा में मेहनत करना जरूरी है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी का स्थायी वास वहीं होता है, जहां मेहनत के साथ धर्म और सदाचार का पालन किया जाता है। इसलिए मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने कर्म करते रहना चाहिए। दीपावली पर लक्ष्मी-विष्णु की पूजा के साथ इस संदेश को जीवन में उतारना भी सुख, शांति और समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

 

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