देश की अग्रणी कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट निर्माता कंपनी ACE (Action Construction Equipment Limited) और जापान की प्रतिष्ठित मोबाइल क्रेन निर्माता KATO Works Co., Ltd. ने भारत में हाई-कैपेसिटी क्रेन निर्माण के लिए 50:50 हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम ACE KATO Pvt. Ltd. शुरू करने की घोषणा की है। नई कंपनी भारत में आधुनिक तकनीक से लैस ट्रक क्रेन, क्रॉलर क्रेन और रफ टेरेन क्रेन का निर्माण करेगी, जिनकी आपूर्ति घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी की जाएगी।
संयुक्त उद्यम के तहत हरियाणा में लगभग ₹200 करोड़ के निवेश से 11 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की गई है। इस निवेश का उपयोग आधुनिक उत्पादन प्रणाली, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन, अनुसंधान एवं नए उत्पादों के विकास में किया जाएगा। भविष्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त निवेश भी किया जाएगा।
इस साझेदारी में KATO अपनी वैश्विक इंजीनियरिंग, डिज़ाइन और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगी, जबकि ACE मैन्युफैक्चरिंग, लोकलाइजेशन, सोर्सिंग और सप्लाई चेन का संचालन संभालेगी। शुरुआती चरण में ट्रक, क्रॉलर और रफ टेरेन क्रेन का निर्माण होगा, जिसके बाद अन्य श्रेणियों की क्रेनों का उत्पादन भी शुरू किया जाएगा।
कंपनी का लक्ष्य भारतीय सप्लायर नेटवर्क के माध्यम से स्थानीय स्तर पर पुर्जों का उत्पादन बढ़ाना है। इससे उत्पादन लागत कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत बनेगी, डिलीवरी समय घटेगा और जापानी गुणवत्ता व सुरक्षा मानकों के अनुरूप विश्वस्तरीय उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
ACE के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सोरब अग्रवाल ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे जापानी तकनीक और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतरीन समन्वय होगा, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर हाई-कैपेसिटी क्रेन निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।
वहीं, KATO Works के डायरेक्टर टोमोयासु काटो ने कहा कि ACE के साथ यह साझेदारी भारत को KATO के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क का महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाएगी। इससे भारत और विदेशों के ग्राहकों को अत्याधुनिक, भरोसेमंद और किफायती क्रेन समाधान उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
यह संयुक्त उद्यम ‘मेड इन India फॉर द वर्ल्ड’ विज़न को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने और वैश्विक कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट वैल्यू चेन में देश की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
