लखनऊ: राजधानी लखनऊ में अवैध और असुरक्षित बेसमेंट के खिलाफ जल्द बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। अलीगंज अग्निकांड के बाद कमिश्नर विजय विश्वास पंत के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने ऐसे बेसमेंट की पहचान और कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। शहर के अमीनाबाद, हजरतगंज, जनपथ, गोमतीनगर समेत कई प्रमुख बाजारों में बड़ी संख्या में बेसमेंट में दुकानें, गोदाम, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, शहर के अधिकांश बेसमेंट मूल रूप से पार्किंग या स्टोर के लिए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन बाद में उनका व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया गया। जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में बेसमेंट अग्निशमन और भवन निर्माण मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। इनमें फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, पर्याप्त वेंटिलेशन और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं हैं।
एलडीए की संयुक्त जांच में यह भी पाया गया कि 80 प्रतिशत से अधिक बेसमेंट बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर संकरी सीढ़ियां, एकमात्र निकास मार्ग और ज्वलनशील सामान का भंडारण आग लगने की स्थिति में बड़े हादसे का कारण बन सकता है। गोमतीनगर के कुछ मॉल में बेसमेंट को फूड कोर्ट और गेम जोन में भी बदल दिया गया है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
एलडीए इस कार्रवाई को तीन चरणों में अंजाम देगा। पहले चरण में स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के बेसमेंट की जांच होगी। इसके बाद घनी आबादी वाले बाजारों में कार्रवाई की जाएगी और अंत में अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बेसमेंट की जांच होगी।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि शहर में केवल लगभग छह प्रतिशत भवनों के नक्शे विधिवत स्वीकृत हैं। उन्होंने कहा कि अवैध और असुरक्षित बेसमेंट संचालित करने वालों को सात दिन का समय दिया जाएगा ताकि वे फायर सेफ्टी सहित सभी आवश्यक मानकों का पालन कर सकें। निर्धारित अवधि के बाद नियमों का पालन न करने वाले बेसमेंट को सील कर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कोचिंग संस्थान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान को मानकों के विपरीत संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
वहीं, व्यापारियों का कहना है कि यदि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई होती है तो हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित होगा। उनका सुझाव है कि नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और सुधार का अवसर दिया जाए, ताकि सुरक्षा भी सुनिश्चित हो और व्यापार भी प्रभावित न हो।
प्रदेश सरकार की ओर से भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय चौधरी ने कहा कि प्रशासन ने सात दिन का समय इसलिए दिया है ताकि सभी संस्थान और कारोबारी फायर सेफ्टी सहित आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर लें। इसके बाद ही नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
