न्यूज डेस्क, लखनऊ
अयोध्या में दीपोत्सव-2026 को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। भगवान श्रीराम की नगरी इस बार 30 लाख दीपों से जगमगाने के लिए तैयार है। राम की पैड़ी से लेकर प्रमुख घाटों, मार्गों और धार्मिक स्थलों तक सजावट और रोशनी की विशेष व्यवस्था की जा रही है। दीपोत्सव की इन तैयारियों को देखने के लिए संत-महात्मा भी अयोध्या पहुंच रहे हैं। उन्होंने रामनगरी के बदलते स्वरूप और दीपोत्सव के आयोजन की सराहना की।
भव्य दीपोत्सव की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे जगतगुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों ने दीपोत्सव को वैश्विक पहचान दिलाई है। आज अयोध्या का यह आयोजन देश की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बन चुका है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस आयोजन को देखने के लिए रामनगरी पहुंच रहे हैं।
स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज ने कहा कि दीपोत्सव का वास्तविक महत्व केवल बाहर दीप जलाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। बाहर का दीप तभी सार्थक है, जब हर भारतीय के हृदय में भगवान श्रीराम के आदर्शों का दीप जले। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सेवा, त्याग, करुणा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दीपोत्सव के अवसर पर इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
वहीं, शशिकांत दास जी महाराज ने कहा कि अयोध्या का वर्तमान स्वरूप त्रेतायुग के उल्लास का दिग्दर्शन करा रहा है। दीपों की सजावट, धार्मिक आयोजन और रामनगरी का भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को उस ऐतिहासिक परंपरा की याद दिलाता है, जब भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर पूरी नगरी में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया था।
आकाश दास जी ने कहा कि पहले युवाओं के बीच धर्म, सनातन और भारतीय संस्कृति को लेकर असमंजस की स्थिति देखने को मिलती थी। अब युवा अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझने के साथ उनसे जुड़ने में रुचि दिखा रहे हैं। दीपोत्सव जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं।
संतों ने कहा कि अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने का अवसर भी है। 30 लाख दीपों से जगमगाने वाली रामनगरी एक बार फिर देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए तैयार है।
