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योगी सरकार में आयुष्मान योजना बनी गरीबों की बड़ी ताकत, बरेली को मिला सबसे ज्यादा लाभ

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही आयुष्मान भारत योजना अब प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बन चुकी है। योजना के तहत अब तक 50 लाख 40 हजार 937 आयुष्मान कार्ड धारक मरीज 91 लाख 87 हजार 418 बार मुफ्त इलाज का लाभ उठा चुके हैं।

इन मरीजों के इलाज के लिए 15 हजार 140 करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम किया गया, जिनमें से अब तक 13 हजार 315 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।

बरेली बना प्रदेश में नंबर-1

साचीज की सीईओ Archana Verma के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत सबसे अधिक भुगतान बरेली जिले में हुआ है। यहां 1 लाख 83 हजार 714 लाभार्थियों ने योजना का लाभ लिया और 3 लाख 72 हजार 319 उपचार क्लेम दर्ज किए गए।

बरेली में इलाज के लिए 682 करोड़ 99 लाख रुपये से अधिक का क्लेम किया गया, जबकि 620 करोड़ 81 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है। इसी के साथ बरेली प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

गोरखपुर और मुरादाबाद दूसरे-तीसरे स्थान पर

गोरखपुर दूसरे स्थान पर रहा, जहां 1 लाख 71 हजार 492 लाभार्थियों ने इलाज कराया। यहां 3 लाख 59 हजार 529 क्लेम दर्ज हुए, जिनके लिए 591 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई। अब तक 539 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है।

वहीं मुरादाबाद तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 1 लाख 29 हजार से अधिक मरीजों ने योजना का लाभ लिया। यहां 519 करोड़ रुपये से ज्यादा का क्लेम दर्ज हुआ, जबकि 459 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।

इन जिलों में भी लोगों को मिली बड़ी राहत

बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ और कानपुर नगर में भी बड़ी संख्या में लोगों ने आयुष्मान योजना का लाभ उठाया। बिजनौर में 486 करोड़ रुपये, सहारनपुर में 463 करोड़ रुपये और वाराणसी में 449 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम दर्ज किए गए।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव

वर्ष 2017 के बाद Yogi Adityanath सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई, जिला अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने पर जोर दिया। इसका फायदा अब गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज के रूप में मिल रहा है।

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