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भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हिंदू पक्ष को राहत; ASI रिपोर्ट में मंदिर होने के संकेत

Bhojshala विवाद मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा कि भोजशाला मूल रूप से मंदिर है। विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई, जिसमें हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों ने अपने-अपने दावे अदालत के सामने रखे।

हिंदू पक्ष भोजशाला को देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं जैन पक्ष ने परिसर में प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है। यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है।

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने एएसआई की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि परिसर से मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख इस बात के प्रमाण हैं कि यह मूल रूप से मंदिर था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

हालांकि एएसआई ने अदालत में कहा कि सर्वेक्षण पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से विशेषज्ञों की निगरानी में किया गया। एएसआई के अनुसार सर्वे टीम में मुस्लिम विशेषज्ञ भी शामिल थे और सर्वे के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद थे।

एएसआई की 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि विवादित परिसर में मस्जिद बनने से पहले परमार काल की विशाल संरचना मौजूद थी और वर्तमान ढांचा मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल कर तैयार किया गया था।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके बाद 22 मार्च 2024 से सर्वे शुरू हुआ और 98 दिनों की जांच के बाद 15 जुलाई 2024 को रिपोर्ट अदालत में सौंपी गई।

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