न्यूज डेस्क, लखनऊ
लखनऊ । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव और सपा सरकार के कार्यकाल से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए उनके बयानों पर सवाल उठाए।
लोकतंत्र के मुद्दे पर भूपेंद्र सिंह का पलटवार
चौधरी भूपेंद्र सिंह ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए सम्मान राशि बढ़ाने के अखिलेश यादव के ऐलान पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने से पहले सपा को अपने राजनीतिक फैसलों और पिछले कार्यकाल को भी देखना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के साथ सपा के राजनीतिक गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर अखिलेश यादव इमरजेंसी का मुद्दा उठाते हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के साथ राजनीतिक रूप से खड़े हैं। भूपेंद्र सिंह ने इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा।
एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर लगाए आरोप
अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे से जुड़े दावों पर भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ और निजी तथा पारिवारिक हितों के लिए परियोजना के रूट में बदलाव किया गया।
भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार के दौरान सड़क निर्माण को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया।
पत्रकार सुरक्षा पर भी साधा निशाना
पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भूपेंद्र सिंह ने शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के मामले का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान पत्रकारों के साथ घटनाएं हुईं और सरकार पर सवाल उठे।
उन्होंने अखिलेश यादव की प्रेस वार्ताओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि असहज सवाल पूछे जाने पर पत्रकारों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस कॉपी में उपलब्ध नहीं है।
राजभर ने अखिलेश की राजनीतिक रणनीति पर उठाए सवाल
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के पुराने राजनीतिक गठबंधनों का जिक्र करते हुए उनकी रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने 2017 में कांग्रेस के साथ सपा के गठबंधन और बाद में दोनों दलों के बीच आए राजनीतिक मतभेदों का हवाला दिया।
राजभर ने कहा कि अलग-अलग चुनावों में सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने अखिलेश यादव के कांग्रेस के साथ मौजूदा राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाया।
PDA को लेकर राजभर का हमला
राजभर ने अखिलेश यादव के ‘PDA’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने राजनीतिक तंज कसते हुए PDA का अलग अर्थ बताया और आरोप लगाया कि सपा में परिवारवाद तथा प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जाती है।
उन्होंने सपा के भीतर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए। राजभर ने आरोप लगाया कि इन वर्गों का राजनीतिक इस्तेमाल वोट बैंक के तौर पर किया जाता है।
मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर भी उठाए सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने सपा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल करते हुए कहा कि चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होने के बावजूद संगठन और उच्च सदनों में उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
उन्होंने PDA में सामान्य वर्ग और अन्य सामाजिक समूहों की हिस्सेदारी को लेकर भी सवाल उठाए।
डिंपल यादव के चुनाव का भी किया जिक्र
राजभर ने डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव का जिक्र करते हुए उस समय की चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विरोधी उम्मीदवारों पर दबाव बनाया गया और नामांकन वापस कराया गया।इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर के बयानों के केंद्र में अखिलेश यादव की ओर से उठाए गए लोकतंत्र, पत्रकार सुरक्षा, एक्सप्रेसवे और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे रहे। दोनों नेताओं ने सपा की पिछली सरकार और मौजूदा राजनीतिक गठबंधनों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव से सवाल किए।
