मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। आज बड़ी संख्या में युवा स्मार्टफोन और यूट्यूब के जरिए देश-दुनिया की जानकारी हासिल कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी नहीं कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर जानकारी सच हो। शिक्षकों को छात्रों को सच और झूठ में अंतर करने तथा फर्जी खबरों और दुष्प्रचार से बचने के तरीके सिखाने होंगे।
सीएम ने कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट और गुमनाम प्लेटफॉर्म के जरिए समाज में भ्रम और विद्वेष फैलाने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे में युवाओं को भ्रामक सूचनाओं से सावधान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के दौर की जरूरत हैं, इसलिए इनसे दूर भागने के बजाय इनका उपयोग समाज और देशहित में जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे सकारात्मक और प्रेरक कंटेंट तैयार कर विद्यार्थियों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि गूगल पर उपलब्ध हर जानकारी प्रमाणिक हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए छात्रों में तथ्यों की जांच करने और आत्म-अनुशासन की आदत विकसित करनी होगी।
योगी ने कहा कि प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई में एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और 3डी प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भी शिक्षकों और छात्रों को इन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि भारत के खिलाफ कोई विदेशी या घरेलू षड्यंत्र समाज में भ्रम, विद्वेष या अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करता है, तो शिक्षण संस्थानों को उसके खिलाफ खड़ा होना होगा। युवाओं को जागरूक करना होगा, ताकि वे तकनीक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल देश और समाज के हित में कर सकें।
