मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल परिसर पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, लालजी प्रसाद निर्मल, अवनीश सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सहित कई जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने डॉ. मुखर्जी के चित्र और प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा का अद्भुत उदाहरण है, जो आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।
‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे’
मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, “‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान, नहीं चलेंगे’ के उद्घोषक, प्रखर राष्ट्रवादी और जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। भारत की एकता व अखंडता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान प्रत्येक देशवासी के हृदय में सदैव राष्ट्रवाद की लौ प्रज्ज्वलित करता रहेगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि वह भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने का एक राष्ट्रीय अभियान था। जम्मू-कश्मीर में अलग व्यवस्था के विरोध में उनका आंदोलन भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।
राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम स्वतंत्र भारत के उन नेताओं में शामिल है जिन्होंने देश की एकता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी विचारधारा को नई दिशा दी। शिक्षा, राजनीति और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
