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IIRF 2026: MMMUT और डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की बड़ी छलांग, BBA-MBA समेत कई कोर्सों में राष्ट्रीय रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन

गोरखपुर के दो प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों—मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDUGU)—ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (IIRF) 2026 में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। दोनों विश्वविद्यालयों ने बीबीए, एमबीए, बीसीए और पत्रकारिता जैसे पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार का प्रमाण दिया है।

MMMUT का BBA देश में टॉप-10 में, यूपी में लगातार नंबर-1

MMMUT के बीबीए कार्यक्रम ने इस वर्ष अखिल भारतीय स्तर पर 10वीं रैंक हासिल की है। पिछले वर्ष यह कार्यक्रम 19वें स्थान पर था। विश्वविद्यालय ने लगातार दूसरे वर्ष उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ बीबीए संस्थान का दर्जा भी बरकरार रखा है।

वहीं, एमबीए कार्यक्रम को देशभर में 66वीं और उत्तर प्रदेश में 10वीं रैंक मिली है। इसके अलावा इंजीनियरिंग श्रेणी में विश्वविद्यालय ने 51वीं रैंक प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता को और मजबूत किया है।

वैश्विक स्तर पर भी चमका MMMUT

MMMUT ने केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत की है। Times Higher Education Sustainability Impact Rankings 2026 में विश्वविद्यालय को 1000–1500 वैश्विक बैंड में स्थान मिला है। वहीं SDG-7 (Affordable & Clean Energy) और SDG-9 (Industry, Innovation & Infrastructure) में 401–600 वैश्विक बैंड हासिल किया है।

DDU ने BBA, BCA और पत्रकारिता में लगाई लंबी छलांग

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने भी IIRF इंडिया रैंकिंग 2026 में कई श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन किया है।

  • पत्रकारिता एवं जनसंचार में देश के 111 संस्थानों में 43वीं रैंक प्राप्त की। यह उत्तर प्रदेश का इस श्रेणी में रैंक पाने वाला एकमात्र राज्य विश्वविद्यालय है।
  • BBA (सरकारी संस्थान) श्रेणी में विश्वविद्यालय ने 25वीं रैंक हासिल की, जबकि पिछले वर्ष यह 33वें स्थान पर था।
  • BCA (सरकारी संस्थान) में विश्वविद्यालय ने 11वीं रैंक प्राप्त की। वर्ष 2025 में इसकी रैंक 22वीं थी, यानी इस बार 11 स्थानों का सुधार हुआ।

कुलपति ने दी सफलता का श्रेय

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस उपलब्धि को शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, पूर्व छात्रों और सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति का परिणाम बताया।

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