नई दिल्ली। भारत ने बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। संयुक्त राष्ट्र की यूएन इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मॉर्टेलिटी एस्टिमेशन (UN IGME) 2025 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसी अवधि में नवजात शिशु मृत्यु दर में 37 प्रतिशत की कमी आई है। यह उपलब्धि वैश्विक औसत से कहीं बेहतर मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता किसी एक योजना का परिणाम नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत करने की दिशा में किए गए व्यापक प्रयासों का नतीजा है। भारत ने गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के मुताबिक, गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 76.2 हो गया है। वहीं संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव भी बढ़कर 91.3 प्रतिशत हो गए हैं।
नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए देशभर में 1,100 से अधिक स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) स्थापित की गई हैं। इसके अलावा 2,868 न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट हर साल लाखों नवजात शिशुओं को विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।
टीकाकरण अभियान ने भी बाल स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से 23 माह की आयु के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 82.6 प्रतिशत हो गया है। वहीं रोटावायरस वैक्सीन कवरेज में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पोषण के मोर्चे पर भी भारत ने सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग की दर 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हो गई है, जबकि गंभीर कुपोषण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है।
नीति आयोग के पूर्व सदस्य (स्वास्थ्य एवं पोषण) डॉ. विनोद के. पॉल के अनुसार, भारत की यह उपलब्धि विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य तंत्र, फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रिय भूमिका और तकनीक के प्रभावी उपयोग ने बाल मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत की यह सफलता दर्शाती है कि सही नीतियों, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और निरंतर प्रयासों के माध्यम से लाखों बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ भविष्य प्रदान किया जा सकता है।
