राजधानी में अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम के अभियान पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम मुख्यालय के आसपास फैले अतिक्रमण के कारण न केवल आम लोगों को रोजाना जाम का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। हाल ही में हजरतगंज क्षेत्र में एक अग्निशमन वाहन लंबे समय तक जाम में फंसा रहा, जिससे व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।
नगर निगम मुख्यालय से लेकर नावेल्टी चौराहा, हजरतगंज थाना और लालबाग स्थित डीएन कंपाउंड तक कार सजावट और ऑटोमोबाइल कारोबार से जुड़ी कई दुकानों ने सड़क और फुटपाथों पर कब्जा जमा रखा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दुकानों के सामने नगर निगम का अतिक्रमण विरोधी अभियान बेअसर नजर आता है, जबकि छोटे दुकानदारों और ठेले वालों पर नियमित कार्रवाई की जाती है।
मेयर के अभियान पर भी उठे सवाल
बताया जा रहा है कि महापौर सुषमा खर्कवाल ने पूर्व में इस क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया था। उस दौरान कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया और अभियान की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हुई थी। हालांकि, समय बीतने के साथ हालात फिर पहले जैसे हो गए और सड़कें दोबारा अतिक्रमण की चपेट में आ गईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम अधिकारियों की उदासीनता और नियमित निगरानी के अभाव में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। ऐसे में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं।
जाम में फंसा अग्निशमन वाहन
हजरतगंज थाने के सामने बने जाम का असर अग्निशमन विभाग पर भी देखने को मिला। क्षेत्र में स्थित फायर स्टेशन से निकला अग्निशमन वाहन अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम के कारण काफी देर तक फंसा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में कुछ मिनटों की देरी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
कार्रवाई न होने पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब नगर निगम मुख्यालय के आसपास ही अतिक्रमण की यह स्थिति है, तो शहर के अन्य इलाकों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अतिक्रमण जारी है और महापौर के निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।
