अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद राजधानी में प्रशासन हरकत में आ गया है। बुधवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और फायर विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान सुरक्षा और भवन मानकों में खामियां मिलने पर कई संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
निरीक्षण के दौरान एलडीए अधिकारियों ने एलन और मोशन कोचिंग सेंटर का जायजा लिया। जांच में पाया गया कि दोनों संस्थान एलडीए द्वारा स्वीकृत भवन मानचित्र प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद एलडीए ने एलन कोचिंग को सीज करने और मोशन कोचिंग सेंटर को खाली कराने के निर्देश जारी किए।

एलडीए के नजूल अधिकारी प्रवीण सिंह ने बताया कि दोनों संस्थानों से स्वीकृत नक्शा मांगा गया था, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
फायर सेफ्टी मानकों की भी हो रही जांच
निरीक्षण अभियान में लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) अंकुश मित्तल भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि फायर सेफ्टी मानकों को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल और 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य नहीं होती, लेकिन ऐसे भवनों में भी फायर सेफ्टी उपकरण रखना जरूरी है।
सीएफओ के अनुसार, बड़ी और बहुमंजिला इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजधानी में करीब 150 होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पहले ही नोटिस भेजे जा चुके हैं।
कार्रवाई पर उठे सवाल
अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई है, लेकिन इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग पहले से ही नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई करते, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, उसका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, जबकि वहां लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। मामले में पुलिस ने भवन मालिक और किरायेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
