लखनऊ। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के बैनर तले बुधवार को प्रदेशभर से आए ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित दारुलशफा के सामने बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के बाद ग्राम रोजगार सेवक विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने पहले से की गई बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक नोकझोंक भी हुई, हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष Ram Lakhan Tiwari ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2021 में ग्राम रोजगार सेवकों के हित में की गई घोषणाएं अब तक लागू नहीं की गई हैं। कई बार शासन स्तर पर मांगें उठाने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें वर्तमान में मात्र 7,788 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। साथ ही कई ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले डेढ़ से दो वर्षों से मानदेय का भुगतान भी नहीं हुआ है, जिसके चलते आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
संगठन का यह भी कहना है कि आर्थिक तंगी और लगातार उपेक्षा के कारण कुछ ग्राम रोजगार सेवकों ने आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए हैं, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की।

प्रदर्शन के दौरान संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रमुख सचिव स्तर पर वार्ता के बाद भी उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो लखनऊ के इको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे आंदोलन भी किए जाएंगे।

ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हर परिस्थिति में पूरी निष्ठा से कार्य किया है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
