दिल्ली के जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार की ओर से खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद देशभर में ऐसे प्रतिष्ठित क्लबों की स्थिति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस फैसले का असर अब अन्य महानगरों पर भी दिखाई देने लगा है, जहां इसी तरह के पुराने और प्रभावशाली क्लबों के कानूनी और लीज संबंधी मामलों पर चर्चा तेज हो गई है।
इस कड़ी में अब लखनऊ जिमखाना क्लब भी सुर्खियों में है। राजधानी लखनऊ का यह ऐतिहासिक क्लब अपने लीज अनुबंध को लेकर पहले से ही कानूनी विवाद में फंसा हुआ है और मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। दिल्ली की कार्रवाई के बाद इस क्लब की स्थिति और भविष्य को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
लखनऊ जिमखाना क्लब शहर के पॉश इलाके में स्थित एक प्रतिष्ठित सामाजिक और खेल संस्थान माना जाता है। यह क्लब न केवल सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है, बल्कि खेलों में भी इसकी एक अलग पहचान है। विशेषकर टेनिस खेल के क्षेत्र में इस क्लब का योगदान उल्लेखनीय रहा है।
करीब सात हजार से अधिक सदस्यों वाला यह क्लब लंबे समय से लखनऊ के उच्च वर्गीय सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यहां स्थित ग्रास कोर्ट पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई मुकाबले खेले जा चुके हैं। इनमें भारत और लेबनान के बीच आयोजित डेविस कप मुकाबला भी शामिल है, जिसने क्लब की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
इसके अलावा क्लब में कई अंतरराष्ट्रीय और सर्किट स्तर के टेनिस टूर्नामेंट भी आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें देश-विदेश के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है। इन आयोजनों ने लखनऊ को खेल मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाने में मदद की है।
फिलहाल, दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद लखनऊ जिमखाना क्लब को लेकर भी कानूनी स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि, मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
