रिपोर्ट- प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ के कैसरबाग स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर और उसके आसपास एक बार फिर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की तैयारी है। नगर निगम के मुताबिक क्षेत्र में 150 से अधिक अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या वकीलों के चैंबरों की है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम को करीब 35 दिनों के भीतर बाकी बचे अतिक्रमण हटाने हैं। सबसे पहले उन चैंबरों और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होगी, जिन पर नगर निगम पहले ही लाल रंग से क्रॉस का निशान लगा चुका है। इनमें करीब **50 ऐसे अतिक्रमण** हैं, जो पिछली दो कार्रवाई के दौरान छूट गए थे।
इसके अलावा नगर निगम करीब 100 से अधिक अन्य अवैध अतिक्रमणों की मार्किंग** करने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार इन स्थानों की जमीन की पैमाइश पहले ही की जा चुकी है।
दो कार्रवाई में 71 अवैध निर्माण ध्वस्त
कैसरबाग जिला कोर्ट के आसपास इससे पहले दो बार अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जा चुका है। 17 मई को हाईकोर्ट के आदेश पर 14 और 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 57 अवैध निर्माण हटाए गए थे। दोनों अभियानों में कुल 71 निर्माण ध्वस्त किए गए।
17 मई की कार्रवाई के दौरान वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान पथराव भी हुआ था, जिसमें कुछ वकीलों और पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं। कार्रवाई के दौरान नाले पर बने चैंबर भी तोड़े गए थे।
नगर निगम ने खाली हुई जगहों पर स्ट्रीट पार्किंग विकसित करने का फैसला किया है।
35 दिन में पूरी करनी होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों से सभी अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्रशासन को करीब 5 सप्ताह यानी 35 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करने** को कहा है।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि पुराने आदेशों के अनुपालन में अब तक 57 और अतिक्रमण हटाए गए हैं। इससे पहले 14 अवैध ढांचे हटाए गए थे।
नगर निगम जोन-1 के जोनल अधिकारी ने 8 सितंबर की रिपोर्ट** में फोटो सहित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का ब्योरा कोर्ट में पेश किया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। 7 अप्रैल 2026 के आदेश** के तहत बाकी सभी अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
10 दिन का नोटिस, रविवार को भी चलेगा अभियान
कोर्ट ने कहा है कि यदि अतिक्रमण से संबंधित वैध दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किए जाते हैं तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिए जा पाने की स्थिति में हिंदी और अंग्रेजी के दैनिक समाचार पत्रों में इश्तिहार प्रकाशित कराया जाएगा। इसके बाद संबंधित लोगों को जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मिलेगा।
अदालत के कामकाज में किसी तरह की बाधा न हो, इसके लिए हाईकोर्ट ने रविवार को भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने की अनुमति दी है।
कोर्ट ने पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को आपसी समन्वय से नगर निगम की टीमों को पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
