लखनऊ में अधिवक्ताओं की चल रही हड़ताल फिलहाल खत्म हो गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन और लखनऊ बार एसोसिएशन की संयुक्त आम सभा में यह फैसला लिया गया। प्रमुख सचिव (विधि एवं न्याय) की ओर से चैंबर, पार्किंग और न्याय कक्षों के निर्माण का आश्वासन मिलने के बाद 8 जून 2026 तक कार्य बहिष्कार वापस लेने का निर्णय लिया गया।
26 मई को आयोजित संयुक्त आम सभा में सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित के नेतृत्व में बैठक हुई। इसमें लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता और बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए। लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।
दरअसल, हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम ने कचेहरी परिसर और आसपास बने अवैध चैंबरों के खिलाफ अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था। इस कार्रवाई में करीब 90 चैंबर तोड़े गए थे। कार्रवाई के दौरान कई अधिवक्ताओं ने विरोध जताया। एक वकील ने पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़कर कहा था कि उनका चैंबर अवैध नहीं है और उसे न तोड़ा जाए, लेकिन पुलिस और नगर निगम की टीम ने कार्रवाई जारी रखी।
सरकार के आश्वासन के बाद नरम पड़ा रुख
बार एसोसिएशन की ओर से बताया गया कि 25 मई को रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय को भेजे गए पत्र में अधिवक्ताओं के लिए बैठने की व्यवस्था, नए चैंबर और पार्किंग निर्माण जल्द कराने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही हाईकोर्ट में लंबित मामले में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त आम सभा ने सामूहिक अवकाश को 8 जून 2026 तक स्थगित करने का फैसला लिया। हाईकोर्ट के अगले आदेश के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर 72 घंटे का नोटिस देकर दोबारा आम सभा बुलाई जाएगी।
लाठीचार्ज मामले में कानूनी लड़ाई जारी
17 मई को हुए लाठीचार्ज मामले को लेकर बार एसोसिएशन का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। घायल अधिवक्ताओं की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश शर्मा और ज्योतिरेश पांडेय को नामित किया गया है।
नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद शुरू हुए विवाद ने बड़ा रूप ले लिया था, जिसके विरोध में अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार शुरू किया था। फिलहाल सरकार के आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य होती दिख रही है।
