लखनऊ। राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद क्षेत्र के उमरावल गांव स्थित डाकघर में खाताधारकों की जमा रकम में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके बचत, सुकन्या समृद्धि, आवर्ती जमा (RD) और सावधि जमा (FD) खातों से लाखों रुपये गायब हैं। मामला सामने आने के बाद खाताधारकों में नाराजगी फैल गई। गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण डाकघर पहुंचे और प्रदर्शन कर अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की। मामले की जांच शुरू होने के बाद डाकघर में तैनात शाखा डाकपाल (BPM) प्रमोद को वहां से हटा दिया गया है।
उमरावल गांव स्थित इस डाकघर में करीब 36 गांवों के लोगों के खाते संचालित होते हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव के आसपास करीब 10 किलोमीटर तक कोई बड़ा सरकारी बैंक नहीं होने के कारण ग्रामीणों की बचत का बड़ा हिस्सा डाकघर के खातों में जमा है।
किसी के खाते में हजारों तो किसी के लाखों रुपये कम मिले
खाताधारकों ने अपनी जमा रकम में भारी अंतर होने की शिकायत की है। उमरावल निवासी सावित्री के मुताबिक, उनके खाते में 23,080 रुपये जमा थे, लेकिन जब वह पैसे निकालने पहुंचीं तो खाते में केवल 774 रुपये मिले। अर्जुन कश्यप ने अपने खाते से 4,600 रुपये गायब होने की बात कही है।
मोहिनी का कहना है कि उनके खाते में 61,763 रुपये जमा थे, जबकि बाद में केवल 1,405 रुपये ही शेष मिले। इसी तरह नीतू गुप्ता के खाते में 57,418 रुपये होने के बावजूद केवल 1,418 रुपये बचे मिले। नेहा कश्यप ने भी अपने बचत खाते में जमा 1,28,292 रुपये में से केवल 1,885 रुपये शेष रहने की शिकायत की है।
राहुल के अनुसार, उनके खाते में 75,535 रुपये जमा थे, लेकिन जांच कराने पर केवल 11,836 रुपये ही बचे मिले। मीना ने 26,734 रुपये में से करीब 25 हजार रुपये और कमला ने 55,094 रुपये में से 54,296 रुपये गायब होने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा अरुण कश्यप, रघुरानी, प्रेम मौर्य, सुनील कुमार, हेमकली और आरती मौर्य समेत कई अन्य खाताधारकों ने भी अपनी जमा रकम में गड़बड़ी की शिकायत की है। RD खाताधारक अनीशा का कहना है कि वह हर महीने 500 रुपये जमा करती थीं, लेकिन खाते में रकम दिखाई नहीं दे रही है।
पासबुक जमा कराई, फिर भी नहीं मिली रकम
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर डाकघर के कर्मचारियों ने उनकी पासबुक की प्रतियां जमा करा ली थीं और दो से तीन दिन में खाते में रकम आने का आश्वासन दिया था। हालांकि, कई दिन बीतने के बाद भी पैसा वापस नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने तत्कालीन शाखा डाकपाल प्रमोद से रकम लौटाने की मांग की और उच्च अधिकारियों से शिकायत की।
खाताधारकों ने डाकघर के नियमित समय पर नहीं खुलने और दोपहर दो से तीन बजे के बीच बंद हो जाने की भी शिकायत की है। गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि कर्मचारियों ने दोपहर तीन बजे ही कामकाज बंद कर दिया और वहां से चले गए।
बरामदे में चलता है डाकघर, अलमारी में रखे जाते हैं दस्तावेज
उमरावल गांव में डाकघर एक मकान के बरामदे में संचालित होता है। यहां के दस्तावेज एक अलमारी में रखे जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव तक कार पहुंचने लायक सड़क भी नहीं है और रास्ते में खड़ंजा है। आसपास बैंकिंग सुविधाओं की कमी के चलते लोग लंबे समय से डाकघर पर निर्भर हैं।
डाकघर में मौजूद कर्मचारियों से मामले के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। फिलहाल उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और BPM प्रमोद को वहां से हटा दिया गया है। खाताधारकों को जांच पूरी होने और उनकी जमा रकम वापस मिलने का इंतजार है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही गड़बड़ी की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
