लखनऊ। राजधानी में हाल ही में एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने पूरे परिसर का व्यापक फायर ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय में मौजूद अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकना है।
कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हजारों छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में हुई हालिया घटना सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक विभागों, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और छात्रावासों में उपलब्ध अग्नि सुरक्षा संसाधनों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फायर ऑडिट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और कमियों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम भी तत्काल उठाए जाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अग्नि सुरक्षा को लेकर पहले से ही सतर्कता बरती जा रही थी। इसी क्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) कार्यालय की ओर से 13 जून को सभी विभागों और संकायों को पत्र जारी कर परिसर में उपलब्ध अग्निशामक यंत्रों की संख्या, उनकी कार्यशीलता और वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी गई थी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

सुरक्षा अभियान को मुख्य परिसर तक सीमित न रखते हुए विश्वविद्यालय ने अपने संबद्ध महाविद्यालयों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। सभी संबद्ध कॉलेजों को अपने संस्थानों में अनिवार्य रूप से फायर ऑडिट कराने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि प्रदेश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बनेगा।
