लखनऊ। राजधानी के विकासनगर स्थित रिंग रोड किनारे झुग्गी बस्ती में लगी भीषण आग ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में दो मासूम बहनों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग बेघर हो गए और उनकी जीवन भर की जमा पूंजी राख में तब्दील हो गई।
आग ने ली दो मासूमों की जान
जानकारी के अनुसार, बाराबंकी के काशीपुर निवासी सतीश अपने परिवार के साथ झोपड़ी में रहते थे। घटना के समय उनकी तीन बेटियां—पूहू (4), स्वाति उर्फ श्रुति (2) और आयुषी (2 माह) झोपड़ी में मौजूद थीं। आग लगने पर बड़ी बेटी पूहू किसी तरह बाहर निकल आई, लेकिन वह घबराहट में अपनी छोटी बहनों के बारे में कुछ नहीं बता सकी।
आग पर काबू पाने के बाद जब सर्च ऑपरेशन चलाया गया, तो स्वाति और आयुषी के जले हुए शव बरामद हुए। इस मंजर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार
दोनों बच्चियों का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
250 पीड़ितों की सूची तैयार
जिलाधिकारी Vishakh G ने बताया कि हादसे से प्रभावित करीब 250 लोगों की सूची तैयार कर ली गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी पीड़ितों को उनके नुकसान के आकलन के आधार पर राहत राशि प्रदान की जाएगी।
मृतक परिवार को 8 लाख की सहायता
सरकार की ओर से मृतक बच्चियों के परिजनों को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह तत्काल राहत है और आगे नियमों के तहत अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
राख में बदली जिंदगी भर की कमाई
आग इतनी भीषण थी कि झुग्गियों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। कई परिवारों के जरूरी दस्तावेज और वर्षों की जमा पूंजी नष्ट हो गई। बेघर हुए लोग अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
विधायक ने बांटे राहत चेक
विधायक Om Prakash Srivastava ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और 4-4 लाख रुपये के राहत चेक वितरित किए। उन्होंने सरकार से अतिरिक्त मुआवजा, घायलों के मुफ्त इलाज और प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास व भोजन की व्यवस्था की मांग की है।
पुनर्वास की चुनौती बरकरार
हालांकि प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर हुए नुकसान के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की चुनौती अभी भी बनी हुई है। स्थानीय लोग जल्द और प्रभावी मदद की मांग कर रहे हैं, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।
