नई दिल्ली। निर्देशक इम्तियाज अली अपनी फिल्मों में रिश्तों, भावनाओं और अधूरेपन को बेहद संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारने के लिए जाने जाते हैं। उनकी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी के बीच जन्मी एक प्रेम कहानी को केंद्र में रखती है, जिसमें जुदाई का दर्द और अपने वजूद की तलाश प्रमुख विषय हैं।
कहानी
फिल्म की कहानी 95 वर्षीय ईशर सिंह ग्रेवाल के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी भूमिका नसीरुद्दीन शाह ने निभाई है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके ईशर सिंह की एक ही इच्छा है—पाकिस्तान के सरगोधा स्थित अपने पुश्तैनी घर को आखिरी बार देखना। उनके पोते निरवैर, जिसकी भूमिका दिलजीत दोसांझ ने निभाई है, इस इच्छा के पीछे छिपे अतीत को जानने की कोशिश करता है।
फिल्म फ्लैशबैक के जरिए वर्ष 1947 में पहुंचती है, जहां युवा ईशर सिंह (वेदांग रैना) और जिया (शरवरी) एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। लेकिन देश के बंटवारे के साथ उनकी दुनिया बिखर जाती है और दोनों हमेशा के लिए अलग हो जाते हैं। इसके बाद कहानी अधूरे प्रेम और घर वापसी की चाह के भावनात्मक सफर को दिखाती है।
अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका अभिनय है। नसीरुद्दीन शाह ने बुजुर्ग ईशर सिंह के किरदार में गहरी संवेदनशीलता दिखाई है। उनकी आंखों और चेहरे के भाव कई दृश्यों में संवादों से अधिक असर छोड़ते हैं।
वेदांग रैना ने युवा ईशर सिंह के रूप में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, जबकि शरवरी ने जिया के किरदार में मासूमियत और भावनात्मक गहराई का संतुलित चित्रण किया है। दिलजीत दोसांझ का अभिनय भी सहज है, हालांकि कहानी का केंद्र मुख्य रूप से ईशर सिंह के किरदार पर ही रहता है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
इम्तियाज अली ने बंटवारे को राजनीतिक घटनाक्रम के बजाय मानवीय त्रासदी के रूप में प्रस्तुत किया है। फिल्म का दूसरा हिस्सा भावनात्मक रूप से अधिक प्रभावशाली बनकर उभरता है।
सिनेमैटोग्राफी फिल्म की खास उपलब्धियों में शामिल है। सरगोधा की गलियां, खेत और उस दौर का वातावरण बेहद खूबसूरती से पर्दे पर जीवंत किया गया है। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम भी कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं।
संगीत
ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा जैसा महसूस होता है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों की भावनात्मक गहराई को बढ़ाता है। हालांकि यह उनके कुछ प्रतिष्ठित एल्बमों जैसी ऊंचाई नहीं छू पाता, फिर भी फिल्म के मूड को मजबूती प्रदान करता है।
कमजोर पक्ष
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी धीमी गति है। लगभग तीन घंटे की अवधि वाली यह फिल्म कई जगहों पर जरूरत से ज्यादा ठहरती हुई महसूस होती है। खासकर पहला भाग काफी धीमा है, जिससे सामान्य दर्शकों का धैर्य टूट सकता है। कुछ दृश्यों की लंबाई कम की जा सकती थी, जिससे फिल्म अधिक प्रभावी बन सकती थी।
फैसला
‘मैं वापस आऊंगा’ एक गंभीर और भावनात्मक फिल्म है, जो बंटवारे के दर्द और अधूरे प्रेम को संवेदनशीलता के साथ पेश करती है। नसीरुद्दीन शाह का शानदार अभिनय, इम्तियाज अली का निर्देशन और ए.आर. रहमान का संगीत इसे खास बनाते हैं। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार हर दर्शक को पसंद आए, यह जरूरी नहीं।
रेटिंग: 2.5/5 स्टार
