दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी से राहत तो दिलाई है, लेकिन कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के चलते सड़कें बंद हो गई हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने की घटनाओं के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ आ गई, जबकि एक सड़क भी बह गई। उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पगलानाला और गुलाबकोटी के पास करीब 11 घंटे तक बंद रहा, जिससे 8 हजार से अधिक श्रद्धालु रास्ते में फंस गए। बाद में प्रशासन ने मलबा हटाकर यातायात बहाल कराया।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से एक अस्थायी लकड़ी का पुल बह गया, जिससे करीब 30 श्रद्धालु कुछ समय के लिए फंस गए। राज्य में भूस्खलन और जलभराव के चलते 46 सड़कें बंद, 181 बिजली ट्रांसफार्मर और 6 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
दूसरी ओर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में मानसून की बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ बारिश और 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। कुछ इलाकों में हवा की गति 80 से 100 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुजरात, कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, ओडिशा और सौराष्ट्र-कच्छ में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। बिहार, झारखंड, तेलंगाना, केरल और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मुंबई और कोंकण क्षेत्र में पिछले 24 घंटे के दौरान 21 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा में भी व्यापक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
उधर, असम में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार अब दो जिलों के करीब 25 हजार लोग प्रभावित हैं। धेमाजी और डिब्रूगढ़ के 52 गांव अब भी जलमग्न हैं, जबकि करीब 393 एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है। प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
