भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित और विवादास्पद दौरों में से एक आपातकाल (1975-77) अब स्कूली शिक्षा में पहले से अधिक प्रमुखता के साथ शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के तहत सामाजिक विज्ञान की नई किताबों में 9वीं कक्षा से ही आपातकाल के इतिहास को पढ़ाने का फैसला किया है।
अब तक आपातकाल का विषय मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं कक्षा के राजनीतिक विज्ञान पाठ्यक्रम का हिस्सा था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत छात्र नौवीं कक्षा से ही इस दौर की घटनाओं और उसके लोकतांत्रिक प्रभावों को समझ सकेंगे। यह बदलाव 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की बरसी के अवसर पर लागू किया गया है।
नई किताब में मिलेगा विस्तृत विवरण
सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में आपातकाल को विशेष स्थान दिया गया है। इसमें बताया गया है कि आपातकाल कब लागू हुआ, कितने समय तक चला और इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ा। पुस्तक में लोकतंत्र की बहाली के लिए हुए आंदोलनों और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन आंदोलन का भी उल्लेख किया गया है।
भारतीय इतिहास और सभ्यता पर बढ़ा फोकस
नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की गई पाठ्यपुस्तकों में भारतीय इतिहास, संस्कृति और सभ्यता को अधिक महत्व दिया गया है। इसके तहत कुछ यूरोप-केंद्रित अध्यायों को हटाया गया है। फ्रांसीसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद, रूसी क्रांति, नाजीवाद और उपनिवेशवाद जैसे विषय अब नई पुस्तक में शामिल नहीं हैं।
इसके स्थान पर छात्रों को हड़प्पा, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन की प्राचीन सभ्यताओं के इतिहास, सामाजिक संरचना, भौगोलिक विस्तार और सांस्कृतिक विकास के बारे में पढ़ाया जाएगा। सुमेरियन सभ्यता की सिंचाई व्यवस्था और निर्माण तकनीकों जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
आपदा प्रबंधन की भी मिलेगी जानकारी
नई किताबों में केवल इतिहास और समाज तक ही सीमित नहीं रहा गया है। छात्रों को प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों से निपटने की जानकारी भी दी जाएगी। ‘Landslide’ शीर्षक वाले अध्याय में भूस्खलन के कारण, जोखिम और बचाव के उपायों को विस्तार से समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी आपदा के समय जागरूक और सुरक्षित रह सकें।
लोकतंत्र की समझ को मिलेगा नया आयाम
NCERT का मानना है कि नए पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक जागरूकता और ऐतिहासिक समझ को विकसित करना भी है। इस बदलाव के बाद विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक विकास को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलेगा।
