Nipah virus infection एक ज़ूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) वायरस है। इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (fruit bats) माने जाते हैं। यह पहली बार 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था और उसके बाद भारत व बांग्लादेश में भी समय-समय पर मामले आते रहे हैं।
यह कैसे फैलता है?
यह वायरस मुख्य रूप से इन तरीकों से फैल सकता है:
- चमगादड़ों की लार, पेशाब या मल से दूषित फल खाने से
- कच्चा खजूर का रस (date palm sap) पीने से, जो चमगादड़ों के संपर्क में आया हो
- संक्रमित जानवरों (खासकर सूअरों) के संपर्क से
- संक्रमित मरीज के शरीर के तरल पदार्थ (लार, खून आदि) के संपर्क से
- इसी वजह से अस्पताल में इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मी ज्यादा जोखिम में होते हैं
लक्षण क्या हैं?
संक्रमण के 4–14 दिन बाद लक्षण दिख सकते हैं:
- तेज बुखार
- सिर दर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- कमजोरी
- खांसी और गले में खराश
- सांस लेने में दिक्कत
गंभीर मामलों में यह दिमाग तक पहुंचकर एन्सेफलाइटिस (brain inflammation) कर सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।
कितना खतरनाक है?
Nipah virus infection की मृत्यु दर काफी ज्यादा मानी जाती है—लगभग 40% से 75% तक, जैसा कि World Health Organization (WHO) ने भी बताया है।
अभी के केस में क्या स्थिति है?
- केरल के कोझिकोड में एक 45 वर्षीय मरीज की पुष्टि हुई है
- 77 कॉन्टैक्ट्स ट्रेस किए गए हैं
- अभी तक किसी में लक्षण नहीं मिले
- 15 लोग हाई-रिस्क कैटेगरी में रखे गए हैं
राहत की बात यह है कि शुरुआती कॉन्टैक्ट्स में अभी कोई लक्षण नहीं दिखे हैं, लेकिन निगरानी जरूरी है।
