नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पांच दिवसीय विदेशी दौरे पर रवाना हो गए हैं। दौरे से लौटने के तुरंत बाद 21 मई को उन्होंने अपनी मंत्रिपरिषद की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और राज्य मंत्री शामिल होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सरकार के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और होर्मुज संकट के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि इसके मद्देनजर कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।
इसके साथ ही राजनीतिक हलकों में यह भी अटकलें तेज हो गई हैं कि इस बैठक के दौरान मंत्रिपरिषद के विस्तार और पुनर्गठन पर भी चर्चा हो सकती है। हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जून में मोदी सरकार में बड़ा फेरबदल संभव है।
बताया जा रहा है कि आगामी राजनीतिक परिस्थितियों, हालिया चुनाव परिणामों और 2027 में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर रणनीतिक बदलाव किए जा सकते हैं। इससे पहले हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने मंत्रिमंडल में विस्तार किया था, जिससे इस चर्चा को और बल मिला है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जून के दूसरे सप्ताह में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से शासन की प्राथमिकताओं को लेकर मंत्रिपरिषद की बैठकें करते रहे हैं, लेकिन इस बार बैठक का समय और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इससे पहले 4 जून 2025 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में प्रधानमंत्री ने सरकार को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया था, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कई विकास एजेंडे प्रभावित हुए हैं और मंत्रालयों को आपात स्थिति में काम करना पड़ रहा है।
