मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश में ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण अभियान ने नई गति पकड़ ली है। प्रधानमंत्री की पेट्रोल-डीजल खपत कम करने की अपील के बाद शुरू हुआ यह अभियान अब प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।
कैबिनेट मंत्री से लेकर सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास 10 कालिदास मार्ग से विधानसभा तक साइकिल से पहुंचकर ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल से कार्यालय जाने का संकल्प लिया।
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग शुरू किया है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

ईंधन बचत को लेकर बढ़ रही जनभागीदारी
मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हिस्सा आयात होता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। ऐसे में ईंधन की बचत केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और संसाधनों के संतुलित उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है। यह पहल सादगीपूर्ण जीवनशैली और प्रदूषण नियंत्रण का संदेश भी दे रही है।

काशी से लेकर पूरे प्रदेश तक असर
वाराणसी में प्रधानमंत्री की अपील और मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का व्यापक असर देखने को मिला। आयुष मंत्री, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने साइकिल, पैदल यात्रा और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाया है। कई जगह ‘नो फ्यूल डे’ की तैयारी भी शुरू हो गई है।गोरखपुर में सांसद रविकिशन शुक्ल ने अपना काफिला छोटा किया है, जबकि महापौर और कई अधिकारियों ने एस्कॉर्ट वाहन हटा दिए हैं।
अयोध्या और बाराबंकी में भी जनप्रतिनिधियों ने सुरक्षा वाहन लौटाकर सादगी का संदेश दिया है। बाराबंकी के जिलाधिकारी अपने आवास से पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे।

प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती और बदलाव
प्रयागराज में डीएम, मंडलायुक्त और पुलिस आयुक्त ने एस्कॉर्ट वाहन हटा दिए हैं। नगर निगम स्तर पर पार्षदों को दोपहिया वाहन उपयोग करने का सुझाव दिया गया है।
मुरादाबाद में मंडलायुक्त साइकिल से कार्यालय पहुंचे, जबकि रामपुर के डीएम ने वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता दी।
मीरजापुर में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फील्ड विजिट में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिकतम उपयोग किया जाए और सरकारी वाहनों का सीमित प्रयोग हो।
