रायबरेली सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग से जुड़ी याचिका पर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ में की जाएगी।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट किया था कि सभी पक्ष निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने जवाब और जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। कोर्ट ने CBI, ED समेत केंद्र सरकार के कई विभागों को नोटिस जारी कर 8 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
DoPT, वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय को भी बनाया पक्षकार
12 मई की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की अर्जी स्वीकार करते हुए भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय को भी मामले में विपक्षी पक्ष के रूप में शामिल करने की अनुमति दी थी।
- DoPT (Department of Personnel and Training) केंद्र सरकार का वह विभाग है जो केंद्रीय कार्मिक व्यवस्था, प्रशासनिक सेवाओं और सतर्कता से जुड़े मामलों को देखता है।
- वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग टैक्स, आर्थिक अपराध और वित्तीय जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों की निगरानी करता है।
- कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय कंपनियों, कॉरपोरेट रिकॉर्ड और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच से संबंधित होता है।
CBI और ED ने शिकायत मिलने की पुष्टि की
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और एजेंसी तय समय में अपना जवाब दाखिल करेगी। वहीं ED ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपों का सत्यापन किया जा रहा है और प्रगति रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी।
SFIO ने मांगा समय
सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने अदालत को बताया कि मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने सभी पक्षों को समयसीमा के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखी गई केस फाइल
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने केस से जुड़े दस्तावेजों और पेपर-बुक को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। यह रिकॉर्ड वरिष्ठ रजिस्ट्रार की निगरानी में रखा जाएगा और अगली सुनवाई पर ही खोला जाएगा।
एमपी-एमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती
यह याचिका लखनऊ की एमपी-एमएलए अदालत के 28 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग खारिज कर दी गई थी।
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने 12 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल किया था। हाईकोर्ट ने 17 फरवरी को याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
कई धाराओं में FIR दर्ज करने की मांग
याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब अदालत की अगली सुनवाई और एजेंसियों की रिपोर्ट पर आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्भर करेगी।
