रिपोर्ट: अंकित पाण्डेय, हमीरपुर
हमीरपुर (राठ)। बारिश की एक झड़ी और नगर पालिका परिषद राठ के विकास के सारे दावे पानी में बह गए। करोड़ों के बजट, बड़े-बड़े वादे और कागजों में चलने वाली नाली-नाला सफाई की हकीकत इस बारिश ने उजागर कर दी। राठ नगर की गलियां सड़कें नहीं, ताल-तलैया बन गई हैं।
हमीरपुर.. जनपद के राठ कस्बे में हल्की सी बारिश ने नगर पालिका प्रशासन की नाकामी की पोल खोलकर रख दी। आलम यह है कि मुख्य मार्गों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक घुटने भर पानी भरा है।
लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं, तो राहगीर जान जोखिम में डालकर इस गंदे पानी से निकल रहे हैं। बारिश होते ही राठ के बजरिया, चौबयाना, सिकंदरपुरा, रामनगर और पुरानी राठ जैसे कई मोहल्ले जलमग्न हो जाते हैं। दुकानों के अंदर पानी घुस रहा है, स्कूली बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। गंदे पानी से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
मशीन से पानी निकालना – समाधान या खानापूर्ति?
शर्मनाक बात यह है कि हर साल की तरह इस बार भी नगर पालिका के पास इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है। जलभराव होने के बाद फोटो खिंचवाने के लिए एक-दो पम्पिंग मशीनें लगा दी जाती हैं और कर्मचारियों को मौके पर खड़ा कर दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि नालों की सफाई बरसात से पहले क्यों नहीं होती? करोड़ों का सफाई बजट कहां जाता है?
हर साल वही कहानी, वही आश्वासन..
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं है। हर साल नगर पालिका अध्यक्ष और EO बड़े-बड़े वादे करते हैं, प्रस्ताव पास होते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं उतरता। नाले चोक हैं, अतिक्रमण चरम पर है और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह से फेल है
अगर राठ नगर पालिका की बात की जाए तो सबसे अमीर पालिकाओं में से एक है तो फिर जनता को हर बारिश में नाव क्यों चलानी पड़ती है?
क्या मशीन लगाकर पानी निकालना ही नगर पालिका का विकास मॉडल है?
आखिर कब मिलेगा इस जल-नरक से स्थायी छुटकारा.. अब देखना यह होगा कि क्या इस बार भी पालिका सिर्फ खानापूर्ति करेगी या वाकई कोई ठोस कदम उठाएगी।
