उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (RKSP) ने वर्ष 2026-27 के स्थानांतरण सत्र को शून्य घोषित करने की मांग उठाई है। परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने सोमवार को मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल पोर्टल पर पत्र भेजकर इस संबंध में 21 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत सुझाव भी प्रेषित किए हैं।
परिषद का कहना है कि वर्ष 2027 के पूर्वार्ध में संभावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह स्थानांतरण सत्र बेहद संवेदनशील हो सकता है। जेएन तिवारी ने आशंका जताई कि यदि बड़े स्तर पर कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि चुनाव को पारदर्शी और सुचारू ढंग से संपन्न कराने के लिए सामान्य ट्रांसफर सत्र को निरस्त किया जाना चाहिए। परिषद का मानना है कि इस समय स्थिर प्रशासनिक व्यवस्था चुनावी तैयारियों के लिए अधिक उपयुक्त होगी।
जेएन तिवारी ने यह भी कहा कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में स्थानांतरण करना आवश्यक हो, तो सभी स्रोतों को मिलाकर एक पारदर्शी और सीमित प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही, केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही तबादले किए जाएं, ताकि प्रशासनिक संतुलन बना रहे और चुनावी कार्य प्रभावित न हों।
परिषद ने अपने सुझावों में यह भी उल्लेख किया है कि कर्मचारियों की तैनाती में संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इसके साथ ही, किसी भी प्रकार के दबाव या पक्षपात से बचने के लिए एक सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
RKSP की इस मांग को प्रशासनिक और चुनावी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है और क्या आगामी स्थानांतरण सत्र को लेकर कोई नई नीति सामने आती है।
