प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक श्लोक पोस्ट करते हुए समाज में बिना किसी अपेक्षा के दूसरों के हित में कार्य करने की प्रेरणा दी।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है—
“पद्माकरं दिनकरो विकचीकरोति
चन्द्रो विकासयति कैरवचक्रवालम्।
नाभ्यर्थितो जलधरोऽपि जलं ददाति
सन्तः स्वयं परहितेषु कृताभियोगाः।”
इस सुभाषित का अर्थ है कि जैसे सूर्य कमल को खिलाता है, चंद्रमा कुमुदिनी को विकसित करता है और बादल बिना मांगे ही वर्षा करते हैं, उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति बिना किसी अपेक्षा के दूसरों का भला करते हैं।
प्रधानमंत्री ने इस संदेश के जरिए समाज में परोपकार, करुणा और निःस्वार्थ सेवा जैसे मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
