सनातन धर्म में पंचक काल को बेहद संवेदनशील और अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तब उस अवधि को पंचक कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए कुछ कार्य अशुभ परिणाम दे सकते हैं।मई 2026 में पंचक 10 मई, रविवार दोपहर 12:13 बजे से शुरू होकर 14 मई, गुरुवार रात 10:34 बजे तक रहेंगे। चूंकि इस बार पंचक की शुरुआत रविवार से हो रही है, इसलिए इसे ‘रोग पंचक’ कहा जा रहा है।सेहत पर पड़ सकता है असर
ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक रोग पंचक के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। पुरानी बीमारियां दोबारा उभर सकती हैं और नई समस्याएं भी घेर सकती हैं। ऐसे में इन पांच दिनों के दौरान खानपान, दिनचर्या और मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। सकारात्मक सोच बनाए रखने और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने को लाभकारी माना गया है।
पंचक काल में क्या न करें?
- पंचक के दौरान नए घर का निर्माण शुरू करना, गृह प्रवेश करना या छत डलवाना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे घर में तनाव और नकारात्मकता बढ़ सकती है।
- इन दिनों लकड़ी, फर्नीचर या ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि दुर्घटना की आशंका मानी जाती है।
- चारपाई, बिस्तर या सोने से जुड़ी वस्तुएं खरीदना भी पंचक में अशुभ माना गया है।
- दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान यात्रा में बाधा, नुकसान या दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
- पंचक काल में मृत्यु को भी अशुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसी स्थिति में विशेष धार्मिक उपाय किए जाते हैं ताकि परिवार पर किसी प्रकार का संकट न आए।
हालांकि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं। इन्हें मानने या न मानने का निर्णय व्यक्ति की व्यक्तिगत सोच और विश्वास पर निर्भर करता है।
